इस योजना के अंतर्गत क्षेत्र विशेष में जाने वाली टीम में शामिल डॉक्टर वहां के लोगों को बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक करने के साथ ही उन्हें परामर्श भी दे रहे हैं। डॉ. अरुण के अनुसार वे महाराष्ट्र के वर्धा जिले में चलाए जाने वाले विलेज एडॉप्शन प्रोग्राम के तहत चंडीगढ़ में काम करने का प्रयास कर रहे हैं।
चंडीगढ़ पीजीआई सामुदायिक चिकित्सा विभाग के डॉक्टर ओपीडी में मरीजों को देखने के बजाय क्षेत्र में जाकर फैलने वाली बीमारियों के कारण व बचाव के उपाय तलाशेंगे। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने उनकी ओपीडी वाले स्वास्थ्य केंद्रों पर मेडिकल ऑफिसर तैनात कर दिए हैं जिससे ओपीडी की सेवा बाधित किए बिना उनके कार्य को सफलतापूर्वक पूरा किया जा सके।
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सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. अरुण अग्रवाल ने बताया कि विलेज एडॉप्शन प्रोग्राम के तहत सामुदायिक चिकित्सा विभाग ने कम्युनिटी बेस्ड सर्विस डिलीवर मॉडल पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत उनके विभाग के बीपीएच, एमपीएच और एमडी स्टूडेंट सहयोग कर रहे हैं। इस कार्य में क्षेत्र के पार्षद व अन्य संबंधित लोगों से भी सहयोग लिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने उनकी इस कार्य योजना को समझते हुए उसमें सहयोग प्रदान करने का निर्णय लिया है।
डॉ. अरुण ने बताया कि अब तक विभाग के डॉक्टर स्वास्थ्य विभाग के सेक्टर-25, 52, 49 और 50 में बनाए गए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में ओपीडी संचालित कर रहे थे, लेकिन अब इस प्रक्रिया में परिवर्तन कर दिया गया है।
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जनवरी से शुरू हो चुका है काम
डॉ. अरुण ने बताया कि नई योजना के अंतर्गत उनके डॉक्टरों ने जनवरी 2023 से काम शुरू कर दिया गया है। पहले फेज में सेक्टर-25 में फोकस किया जा रहा है। इसके अंतर्गत उसकी मैपिंग की जा चुकी है। मैपिंग के आधार पर यह जानकारी मिली है कि क्षेत्र में किन जगह पर गंदगी, अव्यवस्था और बीमारियां फैलने के कारण मौजूद हैं। इस जानकारी के आधार पर बीमारियों का वर्गीकरण और उसके बचाव के उपायों पर भी काम किया जाएगा।
डॉक्टर क्षेत्र में भी मरीजों की कर रहे मदद
इस योजना के अंतर्गत क्षेत्र विशेष में जाने वाली टीम में शामिल डॉक्टर वहां के लोगों को बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक करने के साथ ही उन्हें परामर्श भी दे रहे हैं। डॉ. अरुण के अनुसार वे महाराष्ट्र के वर्धा जिले में चलाए जाने वाले विलेज एडॉप्शन प्रोग्राम के तहत चंडीगढ़ में काम करने का प्रयास कर रहे हैं। वर्धा जिले में मेडिकल कॉलेज के 100 डॉक्टरों की टीम को 15 दिनों के लिए एक गांव में भेज दिया जाता है। इससे उस गांव के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में बेहतर परिणाम प्राप्त हो रहा है। उनका कहना है कि उनके पास डॉक्टरों की इतनी बड़ी टीम नहीं है, फिर भी वर्तमान में जितने भी डॉक्टर उपलब्ध हैं उन्हें इस कार्य में लगा कर बेहतर परिणाम देने का प्रयास कर रहे हैं।