स्वास्थ्य विभाग ने हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस (एचसीएमएस) और हरियाणा सिविल डेंटल सर्विस (एचसीडीएस) के लिए स्नातकोत्तर के संबंध में नई नीति तैयार की है। इसके तहत अब तीन साल की नौकरी के बाद ही एमबीबीएस डॉक्टर पीजी कोर्स कर सकेंगे, जबकि पहले इसके लिए चार साल की शर्त थी। वहीं, पहली बार आठ सुपर-स्पेशलिटी पाठ्यक्रमों को जोड़ा गया है।
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने बताया कि नई नीति के प्रारूप को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है। विज ने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान सीखे गए अनुभव के आधार पर बायोकेमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, रेडियोथेरेपी और न्यूक्लियर मेडिसिन की विशेषताओं को एचसीएमएस कैडर में शामिल किया गया है। नई पॉलिसी के तहत पीजी कोर्स के लिए वेतन के साथ ग्रामीण क्षेत्र की दो वर्ष की सेवा सहित कुल तीन साल की नियमित अवधि सेवा पूरी करनी होगी, वहीं बिना वेतन के साथ दो साल की नियमित सेवा या दो साल की नियमित सेवा से कम पर त्यागपत्र देकर ही कोर्स किया जा सकेगा।
बांड शर्तें पूरा करने से पहले नहीं मिलेगी एनओसी
बांड शर्तें पूरा करने से पहले राज्य में या राज्य के बाहर किसी अन्य विभाग में प्रतिनियुक्ति के लिए किसी भी डॉक्टर को एनओसी जारी नहीं की जाएगी। ऐसे ही, प्रोबेशन अवधि की मंजूरी के खंड को जोड़ा गया है। कोर्स विफलता के मामले में पीजीआईएमएस, रोहतक के मेडिकल बोर्ड द्वारा पेनल्टी क्लॉज लागू नहीं किया जा सकता है।
हर साल 100 डॉक्टर करते हैं कोर्स
विशेषज्ञों का कहना है कि हर साल एचसीएमएम के करीब 100 डॉक्टर पीजी कोर्स करते हैं। इनमें से 70 के करीब सरकारी कॉलेजों में और 30 निजी कॉलेजों में कोर्स या डिग्री करते हैं। पिछले कई साल से एचसीएमएस एसोसिएशन भी इस मामले को लेकर आवाज उठाती रही है। नई पॉलिसी बनने से डॉक्टरों को प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटों का लाभ मिलेगा।
सभी कोर्सों की अलग-अलग बांड राशि तय
अलग-अलग कोर्सों के लिए डॉक्टरों को बांड भरने होंगे। वेतन सहित पीजी डिग्री के लिए एक करोड़ रुपये, पीजी डिप्लोमा के लिए 65 लाख और सुपर-स्पेशलिटी कोर्स के लिए 1.50 करोड़ रुपये की राशि तय की है। बिना वेतन के सुपर स्पेशलिटी के लिए एक करोड़, पीजी डिग्री के लिए 75 लाख और पीजी डिप्लोमा के लिए 45 लाख रुपये की राशि तय की है। बिना वेतन के प्रोत्साहन, आरक्षण के बिना लाभ के साथ सुपर स्पेशलिटी के लिए 75 लाख, पीजी डिग्री के लिए 40 लाख और पीजी डिप्लोमा के लिए 25 लाख रुपये की राशि होगी। मकान भत्ता का दावा मुख्यालय में पीजी रिजर्व सीटों के विरूद्ध किया जाएगा। इसके अलावा, एनबीई परीक्षा को एनईईटी से जोड़ा है और पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए ऊपरी आयु सीमा 31 मार्च को 45 वर्ष मानी जाएगी।