उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम में उसके खिलाफ फैसला सुनाने वाले अधिकारी ने ही उसकी अपील पर फैसला सुनाते हुए खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने इस मामले में उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के प्रबंध निदेशक को तलब किया था।
हरियाणा की बिजली वितरण इकाइयों में न्याय के सिद्धांत के खिलाफ जाकर दंड देने वाले अधिकारी की ओर से ही अपील पर फैसला सुनाने को हाईकोर्ट ने सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने कहा कि अधिकारी प्राकृतिक न्याय का सिद्धांत नहीं जानते, लगता है कि उनकी ट्रेनिंग सही नहीं हुई है। ऐसे में हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार सहित हरियाणा की बिजली वितरण की सभी इकाइयों के पक्ष बना लिया है।
हाईकोर्ट के समक्ष सुनील कुमार की ओर से दाखिल याचिका पहुंची थी। इसमें बताया गया था कि उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम में उसके खिलाफ फैसला सुनाने वाले अधिकारी ने ही उसकी अपील पर फैसला सुनाते हुए खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने इस मामले में उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के प्रबंध निदेशक को तलब किया था। उन्होंने कोर्ट में हाजिर होकर हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया कि केवल उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम में ही ऐसा नहीं हो रहा, बाकी इकाइयों में भी यही हाल है।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का न जाने कितने सालों से उल्लंघन हो रहा है। सैंकड़ों मामलों में इसी प्रकार से आदेश जारी कर दिए गए। शायद इन अधिकारियों को पब्लिक पॉलिसी व पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की सही ट्रेनिंग नहीं मिली है। भविष्य में ऐसा न हो इसके लिए हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को पक्ष बना लिया है और अधिकारियों की ट्रेनिंग को लेकर कोर्ट का सहयोग करने का आदेश दिया है। साथ ही दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम, हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड, हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड को पक्ष बना लिया है।