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दिवाली 21 अक्टूबर को ही 20 को नहीं : आचार्य शंकर गौतम

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मनीमाजरा। इस बार दिवाली की तारीख को लेकर भ्रम की स्थिति को स्पष्ट करते हुए मनसा देवी मंदिर के सहायक पुजारी आचार्य शंकर गौतम ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार दिवाली 21 अक्टूबर 2025 को ही मनाई जाएगी न कि 20 अक्टूबर को। उन्होंने बताया कि प्रदोष व्यापिनी कार्तिक अमावस्या के दिन लक्ष्मी पूजन का विधान है और इस बार यह तिथि 21 अक्टूबर को ही शास्त्रसम्मत है।
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शास्त्रीय आधार पर तिथि का निर्णय
आचार्य शंकर गौतम ने बताया कि शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है दिनद्वये सत्त्वासत्त्वे परा, प्रदोषव्याप्तौ परा पूर्वा। यदि दोनों दिन प्रदोष काल में अमावस्या की व्याप्ति हो तो दूसरे दिन लक्ष्मी पूजन करना चाहिए। इस वर्ष (विक्रम संवत 2082) कार्तिक अमावस्या 20 अक्टूबर 2025 को 15 घंटे 45 मिनट बाद शुरू होकर 21 अक्टूबर 2025 को 17 घंटे 55 मिनट तक रहेगी। यह अमावस्या दोनों दिन प्रदोष व्यापिनी है। लेकिन शास्त्रों के अनुसार यदि अमावस्या अगले दिन साढ़े तीन प्रहर से अधिक व्याप्त हो और तिथि वृद्धिगामिनी हो तो लक्ष्मी पूजन दूसरे दिन करना उचित है।
पंचांगों का भी यही मत
आचार्य गौतम ने बताया कि श्री मार्तंड पंचांग, शताब्दी पंचांग, निर्णय सागर, पंचांग दिवाकर, श्रीधर आदि प्रमुख पंचांग भी 21 अक्टूबर 2025 को ही दिवाली मनाने की पुष्टि करते हैं। उन्होंने कहा कि पुरुषार्थ चिंतामणि और तिथि निर्णय जैसे शास्त्रग्रंथों में भी यही उल्लेख है कि ऐसी स्थिति में दूसरा दिन ही दीपावली के लिए उपयुक्त है।
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भक्तों से अपील, भ्रम में न पड़ें
आचार्य शंकर गौतम ने भक्तों से अपील की कि वे तिथि को लेकर किसी भ्रम में न पड़ें। उन्होंने स्पष्ट किया कि शास्त्रीय नियमों और पंचांगों के आधार पर 21 अक्टूबर 2025 को ही दीपावली मनाना सर्वथा उचित है। उन्होंने कहा कि लक्ष्मी पूजन और दीपावली का पर्व शास्त्रसम्मत तरीके से 21 अक्टूबर को ही मनाएं। हालांकि इस बार छुट्टी 20 अक्तूबर को ही है।
क्यों खास है प्रदोष व्यापिनी तिथि?
शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का त्रिमुहूर्त) में अमावस्या की उपस्थिति दीपावली के लिए महत्वपूर्ण है। यदि यह तिथि दोनों दिन व्याप्त हो तो दूसरे दिन का चयन शास्त्रों में वरीयता प्राप्त है। खासकर जब अमावस्या साढ़े तीन प्रहर से अधिक समय तक रहे।
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