कोलकाता में महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म व हत्या के मामले से सबक लेते हुए पंजाब सरकार ने अस्पतालों में डॉक्टरों व अन्य स्टाफ की सुरक्षा के लिए अहम कदम उठाया है। अब पंजाब के हर जिले में डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सिक्योरिटी बोर्ड बनाया जाएगा। इसके जरिये अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, मेडिकल कॉलेजों और क्लीनिकों में सुरक्षा मानकों का ऑडिट होगा।
स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह ने बताया कि सभी सरकारी अस्पतालों के प्रबंधन और मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर प्रिंसिपल को यह आदेश जारी किए गए हैं कि सुरक्षा मानकों को लेकर एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) तैयार की जाए। सुरक्षा मानकों पर आधारित पर एसओपी तैयार करने के लिए करने मंगलवार को प्रदेश के हर अस्पताल प्रबंधन और मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर प्रिंसिपलों के नेतृत्व में बैठक बुलाई गई है, जो अगले 48 घंटे के अंदर अपने स्तर पर इस एसओपी को तैयार कर नोटिफाई करेगी। इसके अलावा नाइट शिफ्ट के दौरान महिला मेडिकल प्रोफेशनल के साथ दो पुरुष स्टाफ, जिसमें एक सुरक्षाकर्मी हो, उसे वार्ड के राउंड या मरीजों की जांच परख के समय मौजूद रहने जैसे मानकों को सुनिश्चित करने को कहा है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि पंजाब सरकार ने अपने स्तर पर प्रिवेंशन ऑफ ऑफेंस अगेंस्ट मेडिकल प्रोफेशनल्स एक्ट लागू किया है। पंजाब पुलिस को इस एक्ट के तहत प्रदेश में मेडिकल प्रोफेशनल पर किसी प्रकार के हमले, उत्पीड़न या अन्य किसी मामले में उचित कार्रवाई के लिए कहा है। आईजीपी हेडक्वार्टर डॉ. सुखचैन सिंह गिल ने बताया कि इसके हर एसएसपी और थाना प्रभारी को अपने एरिया में स्थित अस्पताल से संपर्क बनाने के लिए कोऑर्डिनेशन टीम बनाने को कहा है।
स्वास्थ्य मंत्री ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से देश के सभी स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक बुलाने के लिए कहा है, ताकि डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ पर मरीज के इलाज के दौरान उन पर होने वाले हमले या उत्पीड़न से जुड़े मामलों को लेकर कानून बनाए जाएं। उन्होंने कहा कि संसद में इस पर चर्चा होनी चाहिए। बैठक में सांसद डॉ. राजकुमार चब्बेवाल, डॉ. अवनीश कुमार, डॉ. हितेंद्र कौर, डॉ. सुनील कटयाल, डॉ. अखिल सरीन व अन्य अधिकारी मौजूद थे।