किसान आंदोलन के झटके से भाजपा अभी संभली भी नहीं थी कि चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में टिकट बंटवारे के बाद उभरे असंतोष से पार्टी नेता सकते में हैं। कई नेताओं के बगावत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को भी चिंता में डाल दिया है। पार्टी अध्यक्ष द्वारा मेहनत से तैयार किए गए पन्ना प्रमुख भी चिंतित हैं कि उनके समर्थकों को पार्टी ने दरकिनार क्यों किया।
भाजपा ने वार्ड नंबर-20 से देबी सिंह को टिकट दिया है। इससे नाराज होकर जिला सचिव कृपानंद ठाकुर ने आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का एलान किया है। वह शुक्रवार को नामांकन भरेंगे। उन्होंने कहा कि वह पिछले 20 साल से पार्टी की सेवा कर रहे हैं। आरएसएस के स्वयंसेवकों ने भी पार्टी को उन्हीं का नाम भेजा, लेकिन पार्टी ने पहले से ही अपने चहेतों को टिकट देने का मन बनाया था। सर्वे की बात भी झूठी है। कार्यकर्ताओं को धोखे में रखा गया। 2005 में वह पार्टी के मंडल सचिव थे। तब से वह पार्टी के साथ हैं। विपरीत परिस्थितियों में पार्टी को जिताया, तब देबी सिंह का कोई नाम भी नहीं था।
वार्ड नंबर-29 (सेक्टर-55, 56, पलसौरा) से भाजपा ने जिला अध्यक्ष रविंद्र पठानियां को टिकट दिया है। इसके खिलाफ कई कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा दे दिया है। कहा है कि मंडल प्रधान ने 19 नाम भेजे हैं। उनमें से किसी का चयन किया जाना चाहिए। उन्हें बाहरी उम्मीदवार स्वीकार नहीं है। एक पत्र में 30 से ज्यादा कार्यकर्ताओं ने साइन किए हैं। इनमें जिला के कई पदों के नेता हैं। उधर, किशनगढ़ से भी वार्ड नंबर-4 कार्यकारिणी सदस्य, बूथ इंचार्ज समेत अन्य ने इस्तीफा दिया है। मंडल महासचिव ने भी निजी कारणों का हवाला देते हुए पार्टी छोड़ दी है।