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फायदे बता सब कैशलेस करना चाहते हैं मोदी जी, नुकसान तो जान लीजिए

Fri, 02 Dec 2016 04:28 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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मोदी - फोटो : self
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केंद्रीय गृहमंत्रालय से आदेश आ चुका है कि कैशलेस सिटी बनाओ। जमीनी हकीकत ऐसी है कि जानकर लोगों के पांव तले से जमीन खिसक जाए। हर साल काफी संख्या में बैंक उपभोक्ता प्लास्टिक मनी और ऑनलाइन ट्रांजक्शन में फ्राड का शिकार हो रहे हैं। 
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ऐसे मामलों में पुलिस की मदद मिलना और भी दुश्वार है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले तीन साल में चार हजार से ज्यादा शिकायतें पुलिस को मिली हैं और सिर्फ 174 मामले ही पुलिस ने दर्ज किए हैं। 

ऐसे में लोगों को कैशलेस व्यवस्था के लिए मजबूर करना उन्हें साइबर अपराधियों के आगे चारे की तरह परोसने जैसा है। ट्राइसिटी में साइबर फ्राड से लोग किस तरह परेशान है, प्रस्तुत है अमर उजाला की यह विशेष रिपोर्ट.... 
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साइबर फ्राड और ऑनलाइन ट्रांजक्शन धोखाधड़ी कैशलेस व्यवस्था में सबसे बड़ी बाधा है। ट्राइसिटी में हर साल काफी संख्या में लोग इसका शिकार बन रहे हैं। इतना ही नहीं, ठगी का शिकार होने के बाद न उन्हें बैंकों से मदद मिलती है और न ही पुलिस से।  

बड़े धोखे हैं इस कैशलेस में

डिजिटल मोड
साइबर मामलों के एक्सपर्ट राजेश राणा बताते हैं कि सबसे बड़ी जरूरत ऑनलाइन ट्रेडिंग के प्रति सुरक्षा की भावना पैदा करना है। लोग अभी कार्ड से पेमेंट करते हुए डरते हैं, क्योंकि ऑनलाइन फ्रॉड होने पर बैंक व पुलिस दोनों ही अपने हाथ खींच लेते हैं।

डाटा लीक हो तो कार्रवाई के लिए कानून नहीं
साइबर सिक्योरिटी कानून को और सख्त बनाना होगा। अभी अगर आपका बैंक व किसी टेलीक़ॉम कंपनी से डाटा लीक होता है तो इस स्थिति में कोई ऐसा कानून नहीं है कि उस संस्थान के खिलाफ कार्रवाई हो सके। कंपनियां इसका फायदा भी उठाती हैं, मगर ये सब कैशलेस सिस्टम के प्रति लोगों के विश्वास को भी तोड़ता है। 

एटीएम हैक करना है आसान
साइबर एक्सपर्ट का कहना है कि शहर के एटीएम विंडो एक्सपी पर चल रहे हैं, जो कि दो साल पहले ही बंद हो चुका है। इससे हैकर्स आसानी से एटीएम हैक कर सकते हैं। एटीएम में अपडेटेड वर्जन डालना बहुत जरूरी है।

स्वाइप मशीन लेने में लगते हैं 10-12 दिन

swipe machine
बैंकों में आवेदन के बाद स्वाइप मशीन मिलने में दस दिन से ज्यादा लग जाते हैं, जिस वजह से शहर में स्वाइप मशीनों की बड़ी कमी है। प्रशासन ऐसी नीति बनाए कि स्वाइप मशीन दो या तीन दिन में आसानी से मिल सके।

सर्वर डाउन रहता है
ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के लिए इंटरनेट की सुस्त रफ्तार भी एक बड़ी प्रॉब्लम है। राजेश राणा बताते हैं कि अगर शहर को देश का पहला कैशलेस सिटी बनाना है तो सबसे पहले इंटरनेट की रफ्तार को बढ़ाना होगा। 

अक्सर आरएलए व अन्य सरकारी संस्थाओं में देखा जाता है कि सर्वर डाउन है या इंटरनेट बहुत स्लो है, जिसकी वजह से साइट नहीं खुल रही है।

ये मामले हैं सवालिया निशान

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ये मामले हैं सवालिया निशान
केस-1, क्रेडिट कार्ड जेब में, किसी ने 7 मिनट में कर ली 72 हजार की शॉपिंग
मंगलवार सुबह पौने सात बजे सेक्टर-32 निवासी सरवन कुमार के मोबाइल फोन पर धड़ाधड़ चार एसएमएस आए तो उनके होश उड़ गए। एफसीआई हरियाणा में मैनेजर के पद पर तैनात सरवन के क्रेडिट कार्ड से किसी अज्ञात ने सिर्फ सात मिनट में 72 हजार रुपये की शॉपिंग कर डाली।

उनका क्रेडिट कार्ड उनकी जेब में ही था और उससे 6:40 से 6:47 बजे तक चार ट्रांजेक्शन हो गईं। एसएमएस पढ़ते ही वह सेक्टर-34 पुलिस स्टेशन की तरफ भागे। थाने से उन्हें सेक्टर-17 साइबर सेल भेजा गया।

साइबर सेल ने पुलिस हेडक्वार्टर एसएसपी पब्लिक विंडो पर शिकायत देने को कहा। इसके बाद वह सेक्टर-9 में एसएसपी पब्लिक विंडो पर मामले की शिकायत दी। जब वह साइबर सेल पहुंचे तो वहां कहा गया कि अब उनके पास जब उनकी शिकायत आएगी तो वह उन्हें बुला लेंगे।

फर्जी दस्तावेजों पर सिम भी ले लिया, खाते से निकाल लिए 31 लाख

2000 rs note
केस-2, फर्जी दस्तावेजों पर सिम भी ले लिया, खाते से निकाल लिए 31 लाख-
नवंबर में ही सेक्टर-17 पुलिस स्टेशन में सेक्टर-17 के दीपक टेक्सटाइल के मालिक नवदीप बंसल ने शिकायत दी कि उनके खाते से किसी ने 31 लाख रुपये निकाल लिए हैं। जालसाज ने उनके फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मोबाइल कंपनी से सिम भी ले लिया था। इस कारण उनको ट्रांजेक्शन का पता ही नहीं चला।

और यह है चंडीगढ़ पुलिस का हाल
पुलिस से मिले आंकड़ों के मुताबिक 2014 में साइबर से जुड़ी कुल 1251 शिकायतें साइबर सेल के पास आईं। इनमें पुलिस ने 37 केस दर्ज किए। वहीं पुलिस ने 37 मामलों में 19 लोगों को गिरफ्तार किया। 

2015 में साइबर सेल के पास 1238 शिकायतें आईं और 100 केस दर्ज हुए। साइबर पुलिस ने पिछले साल 38 साइबर अपराधियों को भी पकड़ा। इस साल अब तक साइबर सेल में 1341 शिकायतें आ चुकी हैं, जिसमें साइबर पुलिस ने 37 केस दर्ज किए हैं। वहीं 28 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इस साल ऑनलाइन चीटिंग के 23, इंश्योरेंस से जुड़े 5 और 3 केस फेसबुक के रजिस्टर किए हैं। 

अलग से बने साइबर पुलिस स्टेशन
साइबर सेल में पुलिस कर्मचारियों की मांग है कि जैसे साइबर से जुड़े अपराधों में हर साल बढ़ोत्तरी हो रही है। इसके लिए शहर में अलग से साइबर थाना बनना चाहिए, जिसमें पुलिस कर्मचारी भी ऐसे हों जोकि कंप्यूटर और इंटरनेट चलाने में माहिर हों। साथ ही कम से कम साइबर सैल के हर कर्मचारी के पास अपना एक अलग से लैपटॉप या डेस्कटॉप होना चाहिए।
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साइबर सेल और बैंकों में तालमेल की दिक्कत

नरेंद्र मोदी
साइबर सेल अधिकारियों का कहना है कि बैंकों को भी कई बार कहा गया है कि एक सेंट्रलाइज सेंटर स्थापित करें जहां पर किसी भी बैंक से संबंधित जानकारी एक ही जगह से ली जा सके। 

पुलिस का कहना है कि बैंकों से जानकारियां लेने में सबसे ज्यादा दिक्कतें आती हैं। सेल में वाहनों की बड़ी कमी है।

ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के वक्त ये बरतें सावधानियां
- साइबर एक्सपर्ट कहते हैं कि किसी के भी कॉल करने पर उसे अपने क्रेडिट कार्ड व डेबिट कार्ड की जानकारी बिल्कुल न दें। क्योंकि कभी भी बैंक वाले फोन पर डिटेल नहीं मांगते।
- कभी अपना पिन नंबर किसी से सांझा न करें। हर दो-तीन महीने में अपने कार्ड का पिन नंबर बदलते रहें।
- क्रेडिट कार्ड पर वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) सर्विस जरूर रखें। क्योंकि अगर आप का क्रेडिट कार्ड की सूचना किसी को मिल गई तो वह बिना पिन नंबर के ही ई वालेट बना कर ट्रांजेक्शन कर सकता है।
- ऑनलाइन सामान खरीदने पर पेमेंट हमेशा सामान हाथ में आने के बाद ही करें। 
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