पूर्व और मौजूदा सांसदों/विधायकों के खिलाफ दर्ज मामलों के निपटारे में हो रही देरी के मामले में कोर्ट के आदेश के अनुरूप हरियाणा व पंजाब के डीजीपी पेश हुए। हाईकोर्ट ने दोनों को फटकार लगाते हुए पूछा कि लंबित मामलों के निपटारे में देरी क्यों हो रही है? कोर्ट ने दोनों को आदेश दिया कि लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाएं। साथ ही जांच व ट्रायल की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कदम उठाएं।
मामले की सुनवाई आरंभ होते ही जस्टिस एजी मसीह एवं जस्टिस विक्रम अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि हमारा मकसद दोनों राज्यों के डीजीपी को बुला कर उनका समय बर्बाद करना नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करना था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सही से पालन हो। माननीयों के खिलाफ लंबित केसों के ट्रायल को जल्द पूरा किया जाए क्योंकि अभी तक जिस प्रकार से मामलों की जांच लटकती दिखाई दे रही है उससे ट्रायल जल्द पूरा होता प्रतीत नहीं हो रहा है। दोनों डीजीपी ने हाईकोर्ट को विश्वास दिलाया कि वह इस मामले में जांच जल्द पूरी हो और ट्रायल न लटके इसके लिए पूरा प्रयास करेंगे। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई 19 अप्रैल को तय करते हुए दोनों को जांच की स्टेटस रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।
सुनवाई के दौरान पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने हलफनामा दायर कर बताया कि पंजाब सरकार मुस्तैदी से जांच को आगे बढ़ा रही है। जहां 4 जनवरी को 17 मामलों की जांच जारी थी उन मामलों में तेजी से कार्रवाई की गई और वह अब केवल छह मामलों में जांच लंबित है। जिन छह आपराधिक मामलों की जांच जारी है उसमें पूर्व विधायक बिक्रम सिंह मजीठिया, विधायक दलबीर सिंह, पूर्व विधायक हरदयाल कंबोज, विधायक मंतार सिंह बराड़, पूर्व विधायक सुंदर शाम अरोड़ा व पूर्व विधायक साधु सिंह धर्मसोत का नाम शामिल है। 14 फरवरी तक 112 मामलों में ट्रायल जारी है। कोर्ट को यह भी जानकारी दी गई कि सभी जांच करने वाले अधिकारियों को जांच में तेजी लाने का आदेश दिया गया है।