करनाल में डीजीपी यशपाल सिंघल ने कहा कि महिलाओं को छेड़छाड़, रेप जैसी घटनाएं होने पर चुप्पी तोड़नी होगी, तभी उन्हें मजबूती मिलेगी। इज्जत के नाम पर महिलाओं और लड़कियों को चुप रखना गलत है। आने वाले समय में प्रदेश के उपमंडलों में भी महिला थाने खोले जाएंगे। वे रविवार को एनडीआरआई के सभागार में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता डॉक्यूमेंटरी ‘डॉटर्स ऑफ मदर इंडिया‘ की स्क्रीनिंग के अवसर पर बोल रहे थे।
फिल्म को देखने पर डीजीपी की शुरुआती ट्रेनिंग (1986) की यादें ताजा हो गई। डीजीपी सिंघल ने बताया कि वर्ष 1986 में हिसार में डीएसपी परमानंद के नेतृत्व में मैं डीएसपी पद की ट्रेनिंग पर था। उस दौरान एक एसएचओ ने आकर बताया कि गांव लहरिया में एक बच्ची के साथ बलात्कार हो गया। एमएलआर पढ़ी और हम दोनों एक ही गाड़ी में गांव में गये। उस दौरान डीएसपी परमानंद की उम्र करीब 57-58 साल थी और मेरी उम्र 25-26 साल की।
गांव में देखा बच्ची के परिजनों में हाहाकार मची हुई थी। कोई डीएसपी के गले लग के रोने लगा तो कोई एक दूसरे से मिलकर। डीएसपी परमानंद ने तुरंत पीड़ितों को कहा कि जब तक आरोपी नहीं पकड़े जाएंगे हम आपके ही गांव में रहेंगे। पड़ोसी ने ही बच्ची से बलात्कार किया हुआ था। इस तरह रोहतक के एक गांव में नेपाली युवती से निर्मम हत्या की। आरोपी पकड़े और सजा हुई। इस तरह के घिनौने कांड करने वालों को सजा जल्दी ही आनी चाहिए।
अदालत के अनुसार होगी कार्रवाई : डीजीपी
बाद में मीडिया से रूबरू हुए डीजीपी ने कहा कि प्रोफेसर वीरेंद्र का मामला अदालत में है, अदालत जैसा आदेश देगी, उसी के अनुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, मुरथल रेप कांड मामले में डीजीपी ने चुप्पी साध ली। डीजीपी ने प्रदेश के लोगों का आह्वान किया कि वे कानून के दायरे में रहें और अपनी बात कहें।
इस मौके पर महिला बाल कल्याण परिषद की सचिव संतोष अत्रेजा, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान में मुख्यमंत्री के सलाहकार योगेंद्र मलिक, आईजी राजबीर देशवाल, नगर निगम की आयुक्त सुमेधा कटारिया, जेल अधीक्षक शेर सिंह, कपिल अत्रेजा, कुमारी कल्पना विश्वनाथन, सारिका पांडा भट्ट, मोनिका बोधरा, विभा भख्शी, अत्र सिंह सैनी, नगर निगम ईओ धीरज कुमार आदि मौजूद रहे।