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निर्भया कांड पर आधारित फिल्म देख भावुक हुईं महिलाएं

Mon, 21 Mar 2016 12:41 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
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फिल्म - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली का चर्चित निर्भया कांड व पांच साल की बच्ची से रेप कर कुंडी लगाकर फरार जैसी अनेक दिल दहला देने वाली घटनाओं पर रचित विभा बख्शी की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता डॉक्यूमेंटरी ‘डॉटर्स ऑफ मदर इंडिया’ को दर्शकों के बीच दिखाया गया। रविवार को इस फिल्म का प्रदर्शन करनाल के एनडीआरआई के ऑडिटोरियम में हुआ। 45 मिनट चली इस फिल्म ने देखने वालाें के रोंगटे खड़े कर दिये और उनको सिस्कियां भरने पर मजबूर किया। फिल्म देखने वालों में सरपंच, पार्षद सहित शिक्षा संस्थानों के विद्यार्थी, पुलिस फोर्स सहित लोगों और महिलाएं शामिल रहीं।
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फिल्म के प्रदर्शन पर मुख्य अतिथि डीजीपी यशपाल सिंघल, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त सचिव राकेश गुप्ता पहुंचे। फिल्म पूरी होने के बाद डीजीपी यशपाल सिंघल, सरिता, ओएसडी अमरेंद्र सिंह, मधुबन अकादमी के आईजी राजबीर देशवाल, मोनिका सहित अन्य अतिथियों ने सवाल जवाब से बेटी बचाओ, बेटी बढ़ाओ और बेटी पढ़ाओं और उनकी रक्षा करने पर अपने-अपने तर्क दिये। एसपी पंकज नैन ने भी जिलेभर में महिलाओं की सेफ्टी के लिए अभियान चलाने का आह्वान किया।

फिल्म में हर घटना को बारीकी से दिखाया गया। निर्भया कांड 16 दिसंबर 2012 को रात के समय चलती बस में किया। 12 दिन वह जिंदगी मौत से जूझती रही, लेकिन उसकी नर्वस सिस्टम में संक्रमण होने से वह बच नहीं सकी। निर्भया की मौत पर समाज एकजुट हुआ और आरोपियों को सजा दिलवाने के लिए सभी मुखर हुए। निर्भया की मौत भले हो गई, लेकिन दूसरी महिलाओं के लिए यह सबक रहा। अब लोगों की चुप्पी टूटने लगी है और वह पुलिस के पास न्याय के लिए जाने लगे हैं।  
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रेप के आंकड़ों ने खोली पोल
फिल्म में 15 अप्रैल 2012 तक आंकड़ों को भी दर्शाया गया। इसमें रेप के 10 मामलों में पिता का नाम, नौ मामलों में पति व उसके दोस्तों का नाम, पांच मामलों में चचेरे भाई का नाम, नौ मामलों में देवर का नाम, दो मामलों में ससुर का नाम, 115 मामलों में पड़ोसी व रिश्तेदारों का नाम, 178 मामलों में मकान मालिक का नाम, 12 मामलों में प्रेमी का नाम, आठ मामलों में किरायेदार का नाम, तीन मामलों में बोस का नाम, 15 मामलों में इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल व स्टाफ का नाम रिकॉर्ड किया गया है।

दिल दहलाने वाली घटना भी दिखाई
फिल्म में रेप कांड में एक दिल दहला देने वाली घटना दिखाई गई। इसमें एक पांच साल की बच्ची को टॉफी का लालच देकर पड़ोसी ने अपने घर बुलाया और उसने दोस्त के मिलकर बच्ची से बार-बार रेप किया। उसको मरने के लिए छोड़ दिया। पुलिस ने बच्ची को 48 घंटे के बाद बंद कमरे से बरामद किया। डॉक्टरी रिपोर्ट में बच्ची के गुप्तांग गंभीर रूप से घायल हुए। छह बार ऑप्रेशन होने के बाद अब वह चलने फिरने लगी है और उसका स्कूल में दाखिला करवा दिया है।

पुलिस रिपोर्ट से भी डरती हैं महिलायें
फिल्म में बताया गया कि बहुत से मामले इसलिए भी सामने नहीं आते ही महिलाओं को बार-बार घटना का जिक्र करना पड़ता है। पहले पुलिस रिपोर्ट में, फिर जज के सामने और बहस के दौरान भी कई बार वही घटना दोहरानी पड़ती है। इससे महिला का बार-बार बलात्कार किया जाता है। फिल्म में बताया गया कि घटना बताने में शर्म न करें। आज आप लड़ेंगी तभी तो कल हमारी बच्चियां सुरक्षित रह सकती हैं।

कानूनी और पुलिसिया ढांचे को मजबूत बनाने की बात
एकेडमी पुरस्कार जीत चुकी मैरयन डि लियो द्वारा निर्मित और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता विभा बख्शी द्वारा निर्देशित डॉटर्स ऑफ  मदर इंडिया में भारत के संयुक्त मनोविज्ञान पर निर्भया के नृशंस गैंग रेप के प्रभावों पर प्रकाश डाला गया है। एक डॉक्यूमेंटरी से कहीं अधिक है। यह एक अभियान है- जो इस मिथक को दूर करता है कि भारत दुनिया की रेप राजधानी है और यौन हमलों पर निष्क्त्रिस्य बिंदुकरण के खिलाफ लोगों की राय को उत्प्रेरित करता है।
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