फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'पाकिस्तान के हाथ में ड्रग रैकेट का रिमोट'

Sat, 28 Jun 2014 10:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
पंजाब के पूर्व डीजीपी (जेल) शशिकांत ने प्रदेश में ड्रग्स तस्करी के मुद्दे पर ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में कहा कि इसके जड़ें जमाने के कारणों में नेताओं और कई अधिकारियों के नेक्सस मुख्य है।
विज्ञापन


इसके साथ ही उन्होंने इस समय भारत और विशेष रूप से पंजाब को विदेशी ही नहीं, बल्कि देसी ड्रग्स से भी बड़ा खतरा बताया। उनके अनुसार ड्रग्स सप्लाई चेन की सीक्रेसी भी तस्करी के फलने-फूलने के अहम कारकों में से एक है। तस्करों और आईएसआई का नेटवर्क इतना गुप्त है कि लंबे समय तक इसका पता ही नहीं चल पाता।

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई को मिलने वाला सीक्रेट फंड और पकड़े गए नशे में से अधिकतर को छिपा जाना भी ड्रग्स कारोबार के बढ़ने के कारणों में प्रमुख है। प्रस्तुत है इस बातचीत का दूसरा भाग :-
विज्ञापन
Trending Videos

केवल तस्करी से नहीं आता, बल्कि पैदा भी किया जाता है

प्र. क्या केवल तस्करी से आ रहे नशों से ही पंजाब को खतरा है?
उ. नहीं, अब यहां भी नशे का उत्पादन होने लगा है। यह फर्मास्यूटिकल ड्रग्स के रूप में है। इनके कई बड़े उत्पादक और तस्कर पिछले दिनों पकड़े गए हैं। इस प्रकार आईएसआई से दो-दो हाथ करने के साथ ही अंदरूनी तौर पर भी बड़ी लड़ाई लड़नी होगी।

प्र. बेशक कुछ नेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत से नशे का इतना बड़ा जाल फैल गया, लेकिन हमारा सुरक्षा व खुफिया तंत्र कैसे इसमें फेल हो गया?
उ. आईएसआई और ड्रग तस्करों का ऑपरेशन इतना सीक्रेट होता है कि इसका पता इस काम में जुड़े कुरियरों को भी नहीं होता। एक कुरियर को केवल यह पता होता है कि उसे ड्रग्स कहां से लेकर कहां तक पहुंचानी है। वहां से इसे आगे कौन ले जाएगा, इसकी जानकारी उसे नहीं होती। इसी प्रकार जो व्यक्ति अगली जगह से उठाकर ड्रग्स को और आगे ले जाता है, उसे नहीं पता होता कि उसे संबंधित स्थान पर कौन छोड़ कर गया।

केवल आईएसआई वाले और बड़े सप्लायरों को ही अलग-अलग कुरियरों का पता होता है और वही अंतरराष्ट्रीय मिस कार्ड्स के जरिए उनके संपर्क में रहते हैं। फिर भी यह हमारी एजेंसियों की नाकामी को दर्शाता है कि अभी तक इसकी काट नहीं ढूंढी जा सकी और नशे का जाल फैलाता ही चला गया।

आईएसआई कर रही नशे के धंधे को फीड

प्र. क्या केवल भारत और विशेष रूप से पंजाब के विनाश के लिए ही आईएसआई इस धंधे को फीड कर रही है?
उ. आईएसआई का पूरा जोर पंजाब के नौजवानों को तबाह करने पर लगा रहा है। फिर चाहे वह आतंकवाद का दौर रहा हो या अब ड्रग्स का जाल।

इसके साथ ही आईएसआई को हासिल होने वाला सीक्रेट फंड भी नशों की पंजाब में सप्लाई के लिए जिम्मेदार है। इस फंड का कोई हिसाब-किताब आईएसआई के अधिकारियों को आगे नहीं देना होता।

उन्होंने फंड जारी करने वाली एजेंसी को सिर्फ यह लिखकर देना होता है कि पैसा जिस काम के लिए जारी हुआ था, उस पर खर्च कर दिया गया है।

इस प्रकार आईएसआई कुछ पैसा नशे को भारत भेजने पर खर्च करती है। इस रकम का बाकी इसके अधिकारियों व राजनेताओं की जेबों चला जाता है। इसके साथ ही हेरोइन तस्करी से होने वाली कमाई तो है ही।
विज्ञापन

पकड़ा जाता है नशा, फिर भी भरपूर मात्रा में

प्र. बॉर्डर पर तैनात हमारी सुरक्षा एजेंसियां रोजाना ड्रग्स की बड़ी-बड़ी खेपें बरामद करने के दावे करती हैं। फिर कैसे इतना नशा प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में पहुंच जाता है?
उ. मैं पहले भी कह चुका हूं कि गड़बड़ी सिस्टम में ही है। सुरक्ष एजेंसियों और पुलिस में कुछ काली भेड़ें शामिल हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यह बात समान्य रूप से मान्य है कि जितना नशा असल में पकड़ा जाता है, उसमें से केवल 10 फीसदी की ही रिकवरी सामने आती है। अब यह भारत और पंजाब सरकार को देखना है कि यहां रिकवरी की असलीयत क्या है?

प्र. प्रदेश में इस वक्त ‘चिट्टे’ (हेरोइन) का शोर हर तरफ है। इसकी रिकवरी भी बहुत हो रही है। आखिर इसकी स्मगलिंग इतनी कैसे बढ़ गई?
उ. यह अफीम का शुद्ध रूप है। इसकी अमेरिका और यूरोप के देशों में बहुत मांग है। इसकी कीमत पाकिस्तान से चलने के बाद अंतर्राष्ट्रीय मंडी तक पहुंचते-पहुंचते कई गुणा बढ़ जाती है।

पंजाब में इसकी खपत बढ़ने की बात करें, तो यहां पहले से ही अफीम और भुक्की का नशा प्रचलित है। अन्य प्रदेशों की तुलना में पंजाब में संपन्नता भी अधिक है। इसलिए हेरोइन तस्करों के जाल में यहां के नौजवान जल्दी फंस जाते हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें