सेक्टर 30 मंदिर में जलाभिषेक करते शिव भक्त।
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सावन की शिवरात्रि पर चंडीगढ़ के विभिन्न शिवालयों में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा हुआ है। भक्तों ने शिवरात्रि पर बने शिव गौरी योग में भोलेनाथ की पूजा अर्चना की। हरिद्वार से कांवड़ भरकर लाए कावड़ियों ने भी शिवालयों में भोलेनाथ को जल अर्पित किया। वहीं सेक्टर 30 स्थित शिव शक्ति मंदिर में भक्तों के लिए भगवान शंकर के महाकाल स्वरूप के दर्शन की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही मंदिर प्रबंधन की ओर से 12 ज्योतिर्लिंग के भी दर्शन करवाए गए।
मंदिर के प्रधान यादविंदर मेहता ने बताया कि भांग की पत्तियों को पीसकर मंदिर में स्थापित शिवलिंग पर भगवान महाकाल का स्वरूप निर्मित किया जाएगा। जिसका दर्शन भक्तगण दोपहर बाद करेंगे। वहीं मंदिर में हरिद्वार से आए कांवड़ियों द्वारा सामूहिक रूप से 200 लीटर गंगाजल से भगवान का जलाभिषेक कराया गया है। महाकाल के अलावा अन्य ज्योतिर्लिंग फूलों के बनाए गए हैं। ऐसा पहली बार हुआ है।
इस बार श्रेष्ठ योग
देवालय पूजक परिषद के संरक्षक और खेड़ा शिव मंदिर सेक्टर 28 के प्रमुख पुजारी आचार्य ईश्वर चंद्र शास्त्री ने बताया कि शिव पूजन व रुद्राभिषेक के लिए आर्द्रा नक्षत्र एवं मिथुन लग्न दोनों ही सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं। इस वर्ष सावन की शिवरात्रि आर्द्रा नक्षत्र से युक्त एवं मिथुन राशिगत चंद्रमा से व्याप्त है। स्वर्ग की भद्रा होने से भद्रा का दोष भी नहीं है। अतः रुद्राभिषेक व शिव पूजन के लिए बहुत ही सुंदर योग बना है। वहीं सेक्टर 18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉक्टर लाल बहादुर दुबे के बताया कि 26 जुलाई को चतुर्दशी तिथि सायं 6:48 बजे प्रारंभ होगी और 27 जुलाई को रात्रि 9:12 बजे खत्म हो जाएगी।
मुक्तसर में धूमधाम से मनाई गई सावन माह की शिवरात्रि
पंजाब के मुक्तसर में सावन माह की शिवरात्रि के अवसर पर शहर के विभिन्न मंदिरों में उत्सव जैसा माहौल बना रहा। सुबह करीब पांच बजे से ही श्रद्धालु विभिन्न मंदिरों में पहुंचे। टिब्बी साहिब रोड स्थित श्री राम भवन, श्री श्याम मंदिर, श्री रघुनाथ मंदिर, बैंक रोड स्थित महादेव मंदिर, रेलवे रोड स्थित शक्ति मंदिर श्री मनन धाम, रामबाड़ा बाजार स्थित श्री दुर्गा मंदिर गीता भवन, कोटकपूरा रोड स्थित बाबा काशी प्रसाद शिव मंदिर समेत शहर के विभिन्न मंदिरों में सुबह से ही शिव भक्तों के उमड़ने का सिलसिला शुरू हुआ। श्रद्धालुओं ने जल, दूध, दही, घी, शक्कर, फल-फूल, भांग, धतूरा आदि से शिवलिंग का अभिषेक किया। हरिद्वार से गंगाजल लेकर पहुंचे कावड़ियों ने भी गंगा जल से शिवलिंग का अभिषेक किया।