चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के छात्रावास में लड़कियों की नहाते वीडियो बनाने और इसे लीक करने के मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर दाखिल याचिका को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने वापस लेने की छूट देते हुए खारिज कर दिया। याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट जगमोहन सिंह भट्टी ने इस मामले में पंजाब पुलिस की जांच पर असंतोष जताते हुए जांच सीबीआई को सौंपने की अपील की थी।
याचिका में कहा गया कि सरकार लड़कियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकामयाब रही है और छात्रों के बीच डर का माहौल बना है। ऐसे में जांच सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए। याचिका में बताया गया कि वीडियो लीक मामले में यूनिवर्सिटी की ही एक छात्रा को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने इस मामले में अभी तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार जब आरोपी छात्रा हॉस्टल में आई थी तो उसके पास पुराना फोन था जिसे वह बेच चुकी है। लड़की ने यह भी नहीं बताया है कि उसने फोन किसे बेचा है। जो फोन लड़की से बरामद हुआ है उसमें उसके खुद के वीडियो और सह आरोपी से चैट मिली है। याची ने कहा था कि यह मामला जितना छोटा दिखाई दे रहा है उतना छोटा है नहीं। अगर जांच सीबीआई को दी जाती है तो इस पूरे स्कैम का खुलासा संभव है।
मामले के तीन आरोपी शिमला से हैं और सीबीआई इस मामले की जांच करने में सक्षम है। ऐसे में इस मामले की जांच को सीबीआई को सौंपने की याचिका में मांग की गई है। पंजाब सरकार ने बताया कि एसआईटी तेजी से इस मामले में जांच कर रही है। इस केस में चालान भी पेश किया जा चुका है। कोर्ट ने कहा कि अभी सीबीआई जांच की जरूरत नहीं है। ऐसे में याची ने याचिका वापस लेने की छूट मांगी। इसे मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने याचिका को वापस लेने की छूट देते हुए इसे खारिज कर दिया।