दूसरी लहर में कोरोना की गंभीर संक्रमणता के कारणों का पता लगा रहे विभिन्न भारतीय संस्थानों के वैज्ञानिकों की एक टीम ने डेल्टा वेरिएंट (बी.1.617.2) के बारे में खोज की। वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में पाया गया कि डेल्टा वेरिएंट (बी.1.617.2) अन्य वेरिएंट की तुलना में काफी खतरनाक है। अल्फा वेरिएंट की तुलना में इसका ट्रांसमिशन 50 फीसदी से अधिक होने का अनुमान है। इसके अलावा अल्फा की तुलना में डेल्टा वेरिएंट का वायरल लोड अधिक पाया गया है।
सावधानी जरूरी
इससे खुद को सुरक्षित रखने के लिए मास्क पहनें, सामाजिक दूरी रखें। इम्युनिटी पर भी निर्भर करता है, जिसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है, उनके लिए घातक साबित हो सकती है। डेल्टा वेरिएंट श्वसन तंत्र (रेस्पिरेटरी ट्रैक) और पेट में इंफेक्शन (जीआई ट्रैक) को ज्यादा प्रभावित करता है।