चंडीगढ़। यदि जीने का जज्बा है तो व्यक्ति हर चीज हासिल कर सकता है। किसी भी बीमारी से ठीक हो सकता है, चाहे वह लाइलाज ही क्यों न हो। ऐसा ही जज्बा गुजरात के वड़ोदरा के रहने वाले योगेन शाह का भी है। वह एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस से 12 साल जूझने के बाद अब पैदल यात्रा पर निकल पड़े हैं। पहले चरण में 1500 किलोमीटर की पैदल यात्रा के दौरान वह मंगलवार को चंडीगढ़ पहुंचे। यात्रा के दौरान वह गंभीर बीमारी को हराने के लिए सादे भोजन और नियमित दिनचर्या के प्रति लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
चंडीगढ़ पहुंचे योगेन शाह ने बताया कि वह रीढ़ की हड्डी में होने वाली एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस की बीमारी से 2003 से जूझ रहे हैं। 12 साल पहले इस बीमारी से जूझने के बाद उन्हें पता चला कि वह लाइलाज बीमारी से जूझ रहे हैं। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। जिंदगी को जीने के जज्बे ने उनमें एक बार फिर नई ऊर्जा भरी और कुछ सालों के अथक प्रयासों से उन्होंने इस बीमारी पर विजय प्राप्त कर ली। योगेन ने बताया कि सादे भोजन (जंक फूड रहित भोजन), नियमित योग, साइक्लिंग के साथ ही दयाभाव और सेवाभाव से इस बीमारी पर विजय मिल पाई है। अपने इन अनुभवों को वह अब लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।
बचत से कर रहे हैं यात्रा पर खर्च
योगेन शाह ने बताया कि लोगों को जागरूक करने के लिए उन्होंने पैदल यात्रा से सही जीने की आजादी की मुहिम शुरू की है। इस मुहिम में होने वाले खर्च को वह अपनी बचाई गई जमा-पूंजी से कर रहे हैं। वह वड़ोदरा में एक निजी कंपनी में कार्य करते हैं। पहले चरण की जागरूकता यात्रा का अंतिम पड़ाव दिल्ली में होगा। वह चंडीगढ़ से 31 जुलाई को दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
एक दिन में 30 किलोमीटर चलते हैं पैदल
योगेन यात्रा के दौरान एक दिन में 30 किलोमीटर पैदल चलते हैं। इस दौरान रास्तों में पड़ने वाले ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोगों को बीमारियों से उबरने के लिए जागरूक करते हैं। गुजरात से उन्होंने एक महीने पहले अपनी इस मुहिम की यात्रा शुरू की थी।
एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के लक्षण
एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करती है। अगर किसी को यह बीमारी है तो उसकी कमर, पेल्विस और नितंबों में दर्द शुरू हो जाता है। वैसे यह बीमारी पूरे शरीर को भी प्रभावित कर सकती है। बीमारी के शुरुआती चरण में, मरीज को अक्सर कमर दर्द की शिकायत रहती है। बहुत से लोग इसे सामान्य दर्द मानकर इलाज नहीं कराते हैं। यही वजह है कि इस बीमारी की पहचान में देरी हो जाती है। अगर आपकी कमर में लगातार दर्द की शिकायत रहती है तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।