चंडीगढ़। ऑनलाइन कक्षा में विद्यार्थियों की रुचि कम हो गई है। आलम यह है कि ज्यादातर कक्षाओं में सिर्फ शिक्षक का कैमरा और माइक चालू और बच्चों का बंद रहता है। साथ ही विद्यार्थियों का आपस में तालमेल भी बहुत कम हो गया है। इन सब कारणों के चलते विद्यार्थी अब ऑनलाइन कक्षा में अधिक रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसका प्रमुख कारण यह भी है कि ऑनलाइन परीक्षा के चलते कई बच्चे नकलची बन चुके हैं। परीक्षा में भी उनका सही से मूल्यांकन नहीं हो पा रहा है। बता दें कोरोना के चलते स्कूल विद्यार्थी पिछले एक साल से ऑनलाइन कक्षाएं लगा रहे हैं। अभिभावकों ने बताया कि बच्चों को पढ़ाने के लिए हर समय कक्षा के दौरान उनका ध्यान रखना पड़ता है। वहीं दूसरी तरफ जो अभिभावक नौकरी वाले हैं, उनके बच्चों की पढ़ाई अधिक प्रभावित हो रही है। बच्चे घर पर अकेले कक्षा चालू कर छोड़ देते है, पढ़ाई पर ध्यान नहीं देते हैं।
क्या कहते हैं अभिभावक..
महज खानापूर्ति साबित हो रही ऑनलाइन कक्षा
ऑनलाइन कक्षाएं 50 प्रतिशत ही प्रभावी हैं। एक तो लंबे समय तक स्क्रीन के आगे बैठे रहना अब बच्चों के लिए उबाऊ हो गया है। दूसरा नेटवर्क समस्या और ऑनलाइन में शिक्षक व बच्चे में आपसी तालमेल नहीं होने की वजह से ढंग से पढ़ाई नहीं हो पाती। कई बार बच्चा सवाल पूछता है और नेटवर्क समस्या आ जाती है। कई बार बच्चे सवाल पूछते हैं, उधर नेटवर्क कमजोर हो जाता है। कुल मिलाकर ऑनलाइन में खानापूर्ति हो रही है। मैं कक्षा के समय बेटे का ध्यान रखती हूं। शिक्षक क्या पूछ रहे हैं, बेटा जवाब दे रहा है या नहीं। - कविता बंसल , अभिभावक
बच्चे अब परीक्षा में नकल करना सीख गए
जिन बच्चों के अभिभावक नौकरी के लिए दफ्तर जाते हैं, उनके बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन कक्षा में ज्यादा प्रभावित हो रही है। हम दोनों पति-पत्नी काम पर जाते हैं तो बेटे की कक्षा का ध्यान नहीं रख पा रहे हैं। कई बार बच्चे ऑनलाइन कक्षा चालू कर छोड़ देते हैं, पढ़ाई में ध्यान ही नहीं देते हैं, क्योंकि कक्षा में कैमरा और माइक बंद रहता है। अब बच्चे परीक्षा में भी नकल करना सीख गए हैं, क्योंकि ऑनलाइन परीक्षा में शिक्षक की निगरानी हो नहीं पाती है। इसलिए परीक्षा मूल्यांकन से भी बच्चे के सीखने का अंदाजा नहीं लग रहा है। - कौशल , अभिभावक
खुद ही पढ़ाना पड़ रहा छोटे बच्चों को
मेरी एक बेटी दूसरी कक्षा में पढ़ती है। उसकी कक्षा वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए नहीं लगती है। शिक्षक व्हाट्सएप पर काम भेजते हैं कि आज ये पढ़ा दो, ये गतिविधि करवा दो। छोटे बच्चों को अभिभावकों को खुद ही पढ़ाना पड़ रहा है। वहीं दूसरा बच्चा पांचवीं कक्षा में है, उसकी रोजाना 5 घंटे तक कक्षा लगती है। सुबह उठते ही स्क्रीन के आगे बैठ जाते हैं, कक्षा के बीच में 5 मिनट के अंतराल में खाना-पीना करते हैं। शारीरिक गतिविधि बिल्कुल भी नहीं हो पाती। इसके साथ ही मोबाइल की ज्यादा आदत हो गई है। कक्षा के बाद बच्चे गेम खेलने के लिए भी मोबाइल की जिद्द करते हैं। - प्रवीण, अभिभावक