कोरोना महामारी के बाद लंबे अरसे के बाद निजी और सरकारी स्कूलों में बच्चे ऑफलाइन कक्षाओं के लिए स्कूलों में आए। ऐसे में बच्चों के स्वभाव में बदलाव के साथ उनके अकादमिक प्रदर्शन में गिरावट देखी गई। अब बच्चों को पढ़ाई से पूरी तरह जोड़ने और तनाव से बचाने के लिए स्कूलों में नियमित तौर पर काउंसलिंग की जा रही है। काउंसलर बच्चों में कहानियों और मोटिवेशनल सत्रों के माध्यम से आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं।
यूटी शिक्षा विभाग ने भी लिखित निर्देश जारी कर स्कूलों में प्रतिदिन बच्चों की काउंसलिंग करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कमजोर बच्चों के अलग से सत्र लेने और बच्चों की सहूलियत के लिए स्कूल काउंसलर का नंबर बच्चों के साथ साझा करने की सलाह दी है ताकि बच्चे बेझिझक काउंसलर को फोन कर अपनी परेशानी बात सकें। सरकारी स्कूलों में परीक्षाओं से पहले मार्च के शुरुआती दिनों में नियमित तौर पर काउंसलर की तरफ से बच्चों की कक्षा ली जाती थी। इसमें बच्चों को मोटिवेशनल लेक्चर दिया जाता था साथ ही उनसे स्कूल और घर में आने वाले परेशानियों के बारे में चर्चा की जाती थी जिससे वे अपनी परेशानियां साझा करें और तनाव मुक्त रहें।
समय प्रबंधन को लेकर बच्चे परेशान
मार्च के शुरुआती हफ्तों में बच्चों की ऑफलाइन माध्यम में कक्षाएं लेकर काउंसलिंग होती थी। फिलहाल बच्चों की अधिक समस्या समय प्रबंधन को लेकर आ रही है। इसके लिए बच्चों को टिप्स दिए जाते हैं और कई बार उनका टाइम टेबल बनाने में भी मदद की जाती है। इसके साथ ही कमजोर बच्चों के लिए मोटिवेशनल सत्र आयोजित करवाए जाते हैं। इसके लिए कई बार इंडस्ट्री से भी वक्ता बुलाते हैं। बच्चों को समय समय पर मोटिवेशनल कहानियों की वीडियो भेजी जाती है ताकि वे खुद को कमजोर नहीं समझें।
निधि, काउंसलर, जीएमएसएसएस-15
बच्चों में पैदा हुआ डर, अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे
ऑनलाइन कक्षाओं के बाद अब बच्चों के मन में परीक्षा को लेकर डर बैठ गया है। कई बच्चों सोच रहे हैं कि वे पढ़ाई में कमजोर हैं और अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे। ऐसे में उन बच्चों को सफल हस्तियों की कहानियां सुनाती हूं जिन्होंने कठिन समय में समाज में मेहनत और आत्मविश्वास के जरिए देश में नाम कमाया। बच्चों को टाइम टेबल बनाने में मदद की जाती है। बच्चों को लिखने की आदत कम हो गई है इसके लिए उनके अभिभावकों से भी बातचीत की जाती है कि उन्हें नियमित अभ्यास करवाया जाए और घर में स्मार्टफोन से दूरी बनाना सीखाएं। सभी बच्चों के साथ मोबाइल नंबर साझा किए हुए हैं जिससे बच्चे निजी तौर पर भी अपनी परेशानियां साझा कर सके।
सुनीता कपूर, प्राचार्य और काउंसलर, बाल निकेतन स्कूल-37