गांव की पंच सुनीता और उनके पति सज्जन सिंह दोनों बहाव में लापता हो गए थे। गांव वालों ने पूरी रात दोनों को ढूढ़ा। सोमवार करीब 8:00 बजे गांव झामपुर से पंच सुनीता का शव मिला। प्रशासन के तलाशी अभियान के दौरान मंगलवार शाम करीब 4:30 बजे लापता सज्जन सिंह का शव भी चंडीगढ़ के गांव धनास से बरामद कर लिया गया है।
दोनों बच्चो 5-5 लाख नगद और एक को सरकारी नौकरी
नयागांव में भगत सिंह चौक पर सोमवार दोपहर से ही ग्रामीणों ने धरना दिया। खरड़ के एसडीएम रविंद्र सिंह, डीएसपी सिटी-1 एचएस मान एवं थाना प्रभारी कुलवंत सिंह ने मोर्चा संभाला और ग्रामीणों से कई दौर की वार्ता की। ग्रामीणों की मांग थी कि पीड़ित के दोनों बच्चों को पांच-पांच लाख नगद और एक बच्चे को सरकारी नौकरी मिले लेकिन एसडीएम ने ग्रामीणों से तीन-तीन लाख रुपये नगद और दोनों बच्चों को डीसी रेट पर अनुबंध की नौकरी देने का वादा किया इसके बाद ग्रामीण शव लेकर मुख्यमंत्री आवास की तरफ कूच करने लगे।
मौके पर ज्यादा पुलिस बल नहीं था। इस कारण पुलिस प्रदर्शनकारियों को रोकने में नाकाम रही। प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास के करीब तक पहुंच गए थे। सूत्रों के अनुसार इस घटना के समय चंडीगढ़ का खुफिया तंत्र भी विफल हो गया था, क्योंकि चंडीगढ़ के किसी आला अधिकारी को इस प्रदर्शन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। जब प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास के इतने नजदीक पहुंचे तो प्रशासन के हाथ पैर फूल गए।
प्रदर्शनकारी बीच सड़क पर शव को रखकर पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। इसके बाद मौके पर चंडीगढ़ और पंजाब पुलिस के आला अधिकारी पहुंचे। इसके बाद एसडीएम ने लोगों को आश्वासन दिया कि उनकी जो मांग थी, उन्हें सरकार ने मान लिया है। एसडीएम खरड़ ने मृतक के परिवार वालों को लिखित आश्वासन पत्र भी सौंपा।
प्रशासन पर लगे लापरवाही के आरोप
ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रविवार को घटना के बाद प्रशासन के कुछ अधिकारी खानापूर्ति करने मौके पर पहुंचे थे। इसके बाद पूरी रात गांव के युवाओं ने लापता लोगों की तलाश की थी। जब सुबह 8:00 बजे सुनीता का शव गांव झामपुर में मिला था तो प्रशासन को इसकी सूचना दे दी गई थी। मगर कोई प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा।
घटना की सूचना के बाद से ही प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। राहत एवं बचाव कार्य का लगातार जायजा लिया जा रहा था। रात में अंधेरा होने के कारण बचाव कार्य को बीच में रोकना पड़ा था। सोमवार सुबह मौके पर नायब तहसीलदार माजरी, पटवारी एवं कानूनगो मौजूद थे। ग्रामीणों की जो भी मांग थी, उनको सरकार ने मान लिया है, जो आश्वासन दिया है, उसका केस बनाकर सरकार के पास भेज दिया जाएगा। रविंद्र सिंह, एसडीएम, खरड़।