बठिंडा के गांव फुलेवाला और जेठूके में कर्ज में दबे दो किसानों ने जहर निगल कर खुदकुशी कर ली। दोनों किसानों की पहचान सुखचैन सिंह फुलेवाला और महिंदर सिंह जेठूके के तौर पर हुई है। महिंदर सिंह की आत्महत्या मामले में किसान यूनियन के संघर्ष के कारण नायब तहसीलदार ने सरकार की ओर से तीन लाख रुपये की सहायता राशि का चेक महिंदर सिंह के परिवार को सौंप दिया।
जानकारी के अनुसार गांव फुलेवाला के किसान सुखचैन सिंह पर सरकारी और गैर-सरकारी करीब आठ लाख रुपये का कर्ज था। वह नौ एकड़ जमीन ठेके पर लेकर खेती का काम करता था। वह पिछले कुछ समय से कर्ज के कारण परेशान चला आ रहा था। ग्रामीण सुखदेव सिंह ने बताया कि कर्ज की परेशानी के चलते गुरुवार को किसान सुखचैन सिंह ने जहर निगलकर खुदकुशी कर ली। मृतक अपने पीछे पत्नी और दो बच्चे छोड़ गया है। इस मामले में थाना फूल ने 174 की कार्रवाई कर शव का पोस्टमार्टम को भेज दिया।
इसके अलावा गांव जेठूके के किसान महिंदर सिंह ने भी गुरुवार को जहर पीकर अपनी जान दे दी। भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के ब्लॉक नेता निक्का सिंह और गांव प्रधान मिट्ठू सिंह ने बताया कि महिंदर सिंह पर करीब आठ लाख का सरकारी और गैर सरकारी कर्ज था। किसान यूनियन के संघर्ष के बाद नायब तहसीलदार ने परिवार को तीन लाख की सहायता राशि का चेक सौंपा है। इसके बाद परिवार ने किसान का पोस्टमार्टम करवाने के बाद अंतिम संस्कार कर दिया है।
किसान नेताओं ने कहा कि कई किसानों और मजदूरों ने इससे पहले पंजाब में आत्महत्या कर ली थी लेकिन सरकार ने अभी तक किसी को मुआवजा नहीं दिया है। नेताओं ने महिंदर सिंह और सुखचैन सिंह का पूरा कर्ज माफ करने की मांग की। इसके अलावा मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा राशि और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग भी की।