मिनिस्ट्री ऑफ वेलफेयर का प्रधान निदेशक और सिक्योरिटी फील्ड इंस्पेक्टर बनकर नौकरी लगवाने का झांसा देने और एक लाख रुपये ठगने की कोशिश करने वाले दो शातिरों को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी हिसार के सेक्टर-14 निवासी आरोपी राममेहर (41) और हिसार निवासी परवीन (24) के कब्जे से फर्जी पहचान पत्र, बोलेरो गाड़ी (गाड़ी पर भारत सरकार लिखा हुआ है) के अलावा पुलिस की वर्दी बरामद की गई है। जांच में सामने आया है कि आरोपी राममेहर हरियाणा श्रम विभाग में स्टेनो के पद से निलंबित हो चुका है। दोनों आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर चार दिन का रिमांड हासिल किया है।
मामला चंडीगढ़ सेक्टर-17 स्थित हरमन टेलर की दुकान का है। यहां पुलिस की वर्दी सिलने का काम होता है। बीते सप्ताह दोनों शातिर दुकान पर पहुंचे। आरोपी परवीन ने तीन स्टार वाली पुलिस की वर्दी पहन रखी थी। दोनों ने दुकान मालिक सौरभ वाही को सिक्योरिटी के बक्कल का ऑर्डर दिया। थोड़ी देर बाद एक ने खुद नाम राममेहर बताकर कहा कि वह मिनिस्ट्री ऑफ वेलफेयर का प्रधान निदेशक है, जबकि परवीन ने खुद को फील्ड इंस्पेक्टर बताया।
उन्होंने कहा कि वह किसी की भी मिनिस्ट्री ऑफ वेलफेयर में नौकरी लगवा सकते हैं। इसके बाद सौरभ ने उसकी दुकान पर काम करने वाले जतिन कुमार को नौकरी लगवाने की बात कही। इस पर आरोपियों ने कहा कि वह चपरासी की नौकरी लगवा सकते हैं, जिसकी तनख्वाह 20 से 22 हजार तक रहेगी लेकिन इसके एवज में उसे 10 लाख रुपये देने होंगे।
इसमें से 6 लाख रुपये अफसरों को जबकि बाकी के 4 लाख वह खुद लेंगे। बाद में सौदा चार लाख में तय हुआ और जतिन को नौकरी लगवाने के झांसे में आकर सौरभ ने उन्हें एक लाख रुपये का चेक दे दिया जबकि एक लाख एक हफ्ते बाद और बाकी के दो लाख नौकरी लगने बाद देने का वादा किया।
ऐसे हुआ ठगी का खुलासा
हरमन टेलर के मालिक सौरभ वाही ने बताया कि बक्कल के अलावा दोनों ने कंधे पर लगने वाले 50 बैंड, पी कैप बैच समेत कुल 92 हजार रुपये का ऑर्डर दिया लेकिन आधिकारिक कागज दिखाने को कहा तो उन्होंने अपना-अपना आई कार्ड दिखाया, जो देखने में मोहर के साथ बिल्कुल असली लग रहे थे।
राममेहर ने अपनी तनख्वाह 1 लाख 80 हजार बताई। बाद में जब इंटरनेट पर इतनी ज्यादा तनख्वाह लेने वालों की डिटेल खंगाली तो सौरभ हैरान रह गए। उन्हें पता चला कि मिनिस्ट्री ऑफ वेलफेयर के नाम से तो कोई मंत्रालय ही नहीं है, बल्कि यह मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर है। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी। क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर हरिंदर सिंह सेखों की अगुवाई में सब इंस्पेक्टर अशोक कुमार की टीम ने जाल बिछाया और दूसरी किस्त के एक लाख रुपये देने के लिए दोबारा बुलवाया तो दोनों को रंगेहाथ दबोच लिया गया।
हो चुकी है तीन वर्ष की सजा
क्राइम ब्रांच के अनुसार, आरोपी राममेहर हरियाणा के श्रम विभाग में स्टेनो की नौकरी करता था। पंजाब हरियाणा समेत उसके खिलाफ ठगी के पांच मामले दर्ज हैं। इसमें उसे तीन साल जेल के अलावा 25 हजार जुर्माना हो चुका है। इसी के चलते विभाग ने उसे निलंबित किया हुआ है। वह साथी परवीन को सिक्योरिटी नकली इंस्पेक्टर बनाकर धोखाधड़ी की वारदातों को अंजाम देता था। वहीं क्राइम ब्रांच अब भारत सरकार लिखे बलेरो गाड़ी के अलावा अब तक कितनों से धोखाधड़ी करने वाले केसों के बारे में भी पूछताछ करने में जुटी हुई है।