पंजाब रोडवेज के निदेशक आईएएस परमजीत सिंह को सीबीआई ने सोमवार को दो लाख की रिश्वत लेते उनके दफ्तर से रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। परमजीत सिंह अपने ही विभाग के कार्यवाहक महाप्रबंधक को महाप्रबंधक के पद पर नियमित रूप से पदोन्नत करने के लिए रिश्वत ले रहे थे। परमजीत ने पहले पांच लाख रुपये मांगे थे लेकिन बाद में मामला दो लाख में तय हुआ।
आरोपी की निशानदेही पर मुल्लांपुर के न्यू चंडीगढ़ स्थित घर से सीबीआई ने 50 लाख रुपये भी बरामद किए हैं। परमजीत के घर से नकदी के अलावा गहने, कीमती घड़ियां और अन्य कीमती सामान बरामद हुआ है। इसके अलावा टीम ने आरोपी के बैंक खातों का रिकार्ड भी जब्त कर लिया है। सीबीआई आरोपी को मंगलवार को जिला अदालत में पेश कर रिमांड मांगेगी।
परमजीत सिंह को राज्य सेवाओं से भारतीय प्रशासनिक सेवा में पदोन्नत किया गया था। आरोपी ने जिस अधिकारी से रिश्वत मांगी थी, उसने ही सीबीआई से शिकायत की थी। महाप्रबंधक पद की पदोन्नति के लिए जनवरी में ही एक विभागीय प्रोन्नति समिति (डीपीसी) गठित की गई थी और परमजीत सिंह उसका हिस्सा थे।
आरोप है कि परमजीत ने पहले पदोन्नति के लिए पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी लेकिन बाद में बातचीत के बाद सौदा दो लाख रुपये में तय हो गया। आरोपी ने रिश्वत की राशि समय पर नहीं चुकाने की स्थिति में, परिणाम भुगतने की भी धमकी दी थी। सीबीआई ने शिकायत मिलने के बाद सोमवार दोपहर करीब 12 बजे जाल बिछाया और आरोपी को सेक्टर-17 स्थित पंजाब रोडवेज डायरेक्टर दफ्तर में ही परमजीत सिंह को रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी के दफ्तर से डीपीसी मीटिंग का रिकार्ड जब्त
शिकायतकर्ता जसविंदर सिंह चहल ने शिकायत पत्र में आरोप लगाया कि महाप्रबंधक के पद पर उनकी पदोन्नति होनी थी, जिसके लिए जनवरी 2022 में डीपीसी का गठन किया गया था। परमजीत ने महाप्रबंधक के पद पर पदोन्नति के लिए जसविंदर के नाम की सिफारिश प्रमुख सचिव, परिवहन विभाग के अधिकारी और पंजाब सरकार से करने का आश्वासन दिया। इसके एवज में उसने पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगी। सीबीआई ने आरोपी को गिरफ्तार कर डीपीसी की मीटिंग के रिकार्ड को जब्त कर लिया है।
विभाग के कर्मचारियों को भी सीबीआई ने रोका
दोपहर करीब 12 बजे गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने दफ्तर में ही परमजीत से पूछताछ शुरू कर दी। इस दौरान किसी कर्मचारी को बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई। शाम पांच बजे के बाद भी सीबीआई ने कई कर्मचारियों को बाहर जाने से रोके रखा। जब सीबीआई की जांच खत्म हुई, उसके कुछ देर बाद कर्मचारियों को बाहर जाने दिया गया। रात आठ बजे सीबीआई परमजीत को सरकारी गाड़ी में बैठाकर साथ ले गई।