लुधियाना के कोर्ट परिसर में गुरुवार को हुए बम धमाके में मारे गए गगनदीप सिंह के घर खन्ना की प्रोफेसर कॉलोनी में सन्नाटा पसरा हुआ है। इस मामले पर कोई कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है। गगनदीप को अगस्त 2019 में मोहाली एसटीएफ ने ड्रग केस में गिरफ्तार कर उस पर मामला दर्ज किया था।
इससे पहले वह खन्ना पुलिस में बतौर मुंशी तैनात था। केस दर्ज होने के बाद विभाग ने उसे बर्खास्त कर दिया था। सितंबर 2021 में वह जेल से बाहर आया था। ब्लास्ट से तीन दिन पहले से उसे किसी ने देखा तक नहीं था। शुक्रवार को मोबाइल सिम के माध्मय से उसकी पहचान हुई। देर शाम से एनआईए सहित अन्य जांच एजेंसी ने गगनदीप सिंह के घर को घेर रखा है।
सूत्रों के अनुसार गगनदीप सिंह का एक छोटा भाई भी है जो बिलकुल उसके जैसा ही दिखता है, लेकिन उसका कद छोटा है। सूत्रों के अनुसार गगनदीप के भाई रिंकू से भी पूछताछ की जा रही है क्योंकि वह भी नशा तस्करी में जेल काट चुका है और अभी कुछ समय पहले ही बाहर आया है। जानकारी के अनुसार दोनों भाई एक साल पहले किराए के मकान में रहते थे। फिर उन्होंने गुरु तेग बहादुर नगर में अपना मकान लिया। इसके बाद वे वहां से प्रोफेसर कॉलोनी में शिफ्ट हो गए जहां उन्होंने अपना मकान बनाया।
गगनदीप के पिता अमरजीत सिंह गवर्नमेंट सर्विस से रिटायर हुए थे। वह बस ड्राइवर थे। दोनों भाइयों ने नशा तस्करी से खूब पैसा कमाया और प्रॉपर्टी बनाई। सूत्रों के अनुसार दोनों भाइयों ने एक नाइजीरियन नागरिक से मिलकर एक फार्मूला लिया जिससे वह ऐसी शराब तैयार करते थे जिसमें कम खर्च में ज्यादा प्रॉफिट होता था। वे हाई लेवल पर शराब की तस्करी करते थे।
एनआईए की टीम ने घर के सभी परिजनों को अपनी कस्टडी में ले रखा है। देर रात तक एनआईए की टीम ने परिवार के सभी सदस्यों से अलग अलग पूछताछ की है। वहीं घर की तलाशी भी ली गई है। इस बात का खुलासा नहीं हो पाया है कि घर से कुछ मिला है या नहीं। देर रात को एनआईए टीम के जाने के बाद घर के चारों तरफ पुलिस के पहरा लगा दिया गया है। किसी व्यक्ति को घर के अंदर या बाहर जाने की इजाजत नहीं है।
लुधियाना ब्लास्ट के आरोपी गगनदीप सिंह के खालिस्तानी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल से तार जुड़े होने की बात कही जा रही है। 1978 में बने बब्बर खालसा को पाकिस्तान में बैठा वाधवा सिंह बब्बर ऑपरेट करता है जो 90 के दशक में वहां भाग गया था। इससे पहले अक्तूबर 2007 में लुधियाना के ही शिंगार सिनेमा में हुए बम ब्लास्ट में भी बब्बर खालसा का नाम आया था। उस ब्लास्ट में 7 लोग मारे गए थे और 32 घायल हुए थे। गगनदीप सिंह के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि वह काफी कट्टर विचार का था।