इसके बाद दविंदर सिंह संधू को 30 अप्रैल, 2022 को ठेकेदार हरमोहेंदर सिंह उर्फ हम्मी और गुरअमनप्रीत सिंह से मुलाकात की। तीनों के बीच, रणजोध सिंह द्वारा दी गई शिकायत पर करीब डेढ़ घंटा बातचीत हुई, जिसे दविंदर सिंह संधू ने वीडियो रिकॉर्डिंग कर लिया। इसी दौरान ठेकेदार हम्मी के कहने पर दविंदर सिंह संधू ने दो लाख रुपये का पैकेट गुरअमनप्रीत सिंह को दे दिया, जिसे गुरअमनप्रीत ने अपने पास रख लिया।
तब गुरअमनप्रीत सिंह ने दविंदर सिंह संधू को बताया कि वह इस प्रोजेक्ट संबंधी वनपाल विशाल चौहान से बात करेगा और बाकी पैसों संबंधी बाद में बताएगा। कुछ दिन बाद ठेकेदार हम्मी ने दविंदर संधू से संपर्क करके उन्हें बताया कि उसकी और गुरअमनप्रीत की विशाल चौहान के साथ बातचीत हो चुकी है, जिन्होंने कहा है कि यदि प्रोजेक्ट की शुरुआत करनी है तो उसमें से एक करोड़ रुपये पहले और फिर 10 लाख प्रति महीना और जो भी जमीन बिकेगी, उसमें से पांच लाख बतौर हिस्सा देना पड़ेगा लेकिन दविंदर सिंह संधू यह सारी रिश्वत देने पर सहमत नहीं हुए।
दविंदर संधू ने दी थी विजिलेंस को शिकायत
आखिरकार दविंदर सिंह संधू ने एंटी करप्शन हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। इस पर विजिलेंस ब्यूरो ने कार्रवाई करते हुए उक्त मुकदमे में गुरअमनप्रीत सिंह और ठेकेदार हम्मी को गिरफ्तार कर लिया। जांच में ही यह बात भी साबित हो गई कि गुरअमनप्रीत सिंह और विशाल चौहान ने ही सांठगांठ करके अपने अधीनस्थ मुलाजिमों पर दबाव बनाते हुए दविंदर संधू के पिता के खिलाफ नयागांव थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी।
इसके बाद विशाल चौहान ने गुरअमनप्रीत की मौजूदगी में अपने अधीन कर्मचारियों को कहा था कि इस मुकदमे में दविंदर संधू का नाम भी शामिल करवाया जाए। इसके लिए विशाल चौहान ने कर्मचारियों को खुद टाइप की एक दरखास्त भी मुहैया करवाई। इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो गया कि विशाल चौहान ने उक्त दोनों के साथ सांठगांठ कर दविंदर संधू की कंपनी से मोटी रिश्वत हासिल करने की कोशिश की, इसलिए गुरुवार को विजिलेंस ने उसे भी इस केस में गिरफ्तार कर लिया।