बहुचर्चित पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन भर्ती घोटाले में कमीशन के पूर्व चेयरमैन को पटियाला की अदालत ने 7 साल की कैद की सजा सुनाई है। एक करोड़ का जुर्माना भी लगाया गया है। बाकी 3 को 4-4 साल की सजा सुनाई गई है।
बता दें कि पटियाला की अदालत ने कमीशन के पूर्व चेयरमैन रविंदर पाल सिंह सिद्धू (रवि सिद्धू), पूर्व सेक्रेटरी प्रितपाल सिंह समेत चार को दोषी करार दे दिया था। केस के दो आरोपियों को कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। चारों दोषियों को आज सजा सुनाई गई।
सरकारी वकील बेअंत सिंह धामी ने बताया कि 25 मार्च 2002 को विजिलेंस ब्यूरो ने पंजाब लोक सेवा आयोग के तत्कालीन चेयरमैन रवि सिद्धू को सेक्टर 39 स्थित उसके आवास से गलत ढंग से सिलेक्ट किए एक उम्मीदवार की तरफ से पांच लाख रुपये लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।
मामला सामने आने के बाद विजिलेंस ब्यूरो ने जब जांच शुरू की, तोकई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए कि रवि सिद्धू ने अपने कार्यकाल के दौरान पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों में भर्ती के लिए 4000 उम्मीदवारों की सिफारिश की थी, जिनमें पीसीएस (एग्जेक्टिव), पीसीएस (जुडीशियल), पीसीएस नामीनेशन, डीएसपी और अन्य अलाइड सर्विसेज शामिल हैं।
ज्यादातर भर्तियां पैसे लेकर की गई हैं
जांच में यह भी सामने आया कि इनमें ज्यादातर भर्तियां पैसे लेकर की गई हैं और यह सारा घोटाला रवि सिद्धू पिछले काफी समय से तत्कालीन सेक्रेटरी प्रितपाल सिंह व कुछ बिचौलियों व पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के कुछ प्रोफेसरों की मिलीभगत से कर रहा था।
जांच के दौरान विजिलेंस ब्यूरो को रवि सिद्धू के चंडीगढ़ स्थित बैंक लॉकरों से 8.16 करोड़ का कैश मिला था। इसके अलावा बेनामी संपत्तियों, नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट और शेयरों में निवेश के तौर पर भी 25 करोड़ से अधिक की रिकवरी विजिलेंस ब्यूरो ने की थी।
इन पर दर्ज हुआ मामला
विजिलेंस ब्यूरो ने 30 अप्रैल 2002 को रवि सिद्धू समेत आयोग के तत्कालीन सेक्रेटरी प्रितपाल सिंह, पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के प्रोफेसर जसपाल सिंह, प्रोफेसर जगदीश कालड़ा, प्रोफेसर गुरपाल सिंह, मौजूदा पीसीएस अफसर पुरुषोत्तम सिंह सोढी, बिचौलिए परमजीत सिंह उर्फ पम्मी, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अमरजीत सिंह कंग, रवि सिद्धू की मां प्रितपाल कौर के खिलाफ धारा 409, 420, 467, 471, 120-बी, 34 आईपीसी और 13 (1) (2) ऑफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत पटियाला विजिलेंस ब्यूरो थाने में केस दर्ज किया था।
सोमवार को स्पेशल जज पुष्पिंदर सिंह की कोर्ट ने रवि सिद्धू, पूर्व सेक्रेटरी प्रितपाल सिंह, पुरुषोत्तम सिंह सोढी और बिचौलिए परमजीत सिंह उर्फ पम्मी को दोषी करार दे दिया जबकि प्रोफेसर जसपाल सिंह, प्रोफेसर गुरपाल सिंह को बरी कर दिया गया।
13 साल में पेश हुए 54 गवाह
तेरह साल चले इस केस में कोर्ट में 54 गवाह पेश हुए। इस दौरान तीन आरोपी प्रोफेसर जगदीश कालरा, प्रोफेसर अमरजीत सिंह कंग, रवि सिद्धू की मां प्रितपाल कौर की मौत हो चुकी है।