नेपाली की हत्या कर शव को मक्खनमाजरा के जंगल में जलाने के मामले में पुलिस ने एक आरोपी को काबू किया है। नेपाली धन बहादुर की हत्या चार महीने पहले शराब पिलाने के बाद 40 हजार रुपये लूटने के लिए की गई थी।
अब सवाल यह है कि चार महीने बाद जंगल में शव किसने जलाया? पकड़े गए आरोपी नैनीताल निवासी किरण सिंह ने अपने तीन साथियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया था।
हत्या के बाद सभी आरोपी नैनीताल फरार हो गए थे। किरण से मृतक धन बहादुर का मोबाइल फोन बरामद हुआ है। पुलिस उसके तीनों साथियों की तलाश में जुट गई है, वहीं किरण सिंह को जिला अदालत ने दस दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
मोबाइल फोन ने फंसाया
डीएसपी ईस्ट सतीश कुमार ने बताया कि 25 जनवरी 2017 को मक्खनमाजरा के जंगल में धन बहादुर का आधा जला शव मिला था। मृतक के बेटे दीपक ने बताया था कि पिता नारकंडा में सेब के बाग में काम करते थे।
पुलिस ने जांच में पाया कि धन बहादुर का मोबाइल फोन गायब था। पुलिस ने मोबाइल फोन सर्विलांस और कॉल डिटेल निकाली थी, उसके बाद पता चला कि 13 जनवरी को फोन नैनीताल में किरण सिंह ने चलाया था।
चार महीने शव पड़ा रहा जंगल में
जंगल में मिला जला हुआ शव
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने किरण सिंह के बारे में जांच शुरू की तो पता चला कि वह रविवार को किसी काम से मनीमाजरा आ रहा है। मौलीजागरां पुलिस ने हाउसिंग बोर्ड लाइट प्वाइंट पर नाका लगाकर किरण सिंह को काबू कर लिया था।
घर जा रहा था धन बहादुर
आरोपी किरण ने बताया कि 29 सितंबर 2016 को धन बहादुर शिमला से नेपाल अपने घर जा रहा था। इस दौरान किरण सिंह अपने तीनों साथियों के साथ शिमला बस स्टैंड पर उसे मिला।
वहीं उनको पता चला कि धन बहादुर चालीस हजार रुपये निकालकर नेपाल जा रहा है। वहीं किरण ने अपने तीन साथियों के साथ मिलकर लूट की योजना बनाई। चंडीगढ़ पहुंचने के बाद पांचों ने दड़वा में शराब पी। उसके बाद में शराब की बोतल लेकर धन बहादुर को मक्खन माजरा के जंगल में ले गए, जहां पर उन्होंने धन बहादुर का गला दबाकर हत्या की।
चार महीने शव पड़ा रहा जंगल में
पुलिस ने बताया कि नेपाल निवासी धन बहादुर की हत्या चार महीने पहले 29 सितंबर 2016 को हुई थी। हैरानी यह है कि चार महीने तक शव जंगल में पड़ा रहा।
इस दौरान शव की जानकारी न तो पुलिस को मिली और न ही फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को। पुलिस जांच कर रही है कि धन बहादुर की हत्या करके किरण सिंह समेत चार लोग फरार हो गए थे। उसके बाद धन बहादुर का शव किसने जलाया।