मगर पिछले तीन महीने से बैंक में एक भी पैसा नहीं आया तो आरोपी नरेश के नंबर पर संपर्क किया गया तो मोबाइल स्विच ऑफ था। इसके बाद किसानों ने पावर प्लांट में जाकर पता किया तो मामला पूरा फर्जी निकला, क्योंकि पावर प्लांट में ट्रैक्टर डंपर नहीं थे। पावर प्लांट गोरखपुर के नाम पर हरियाणा व पंजाब के 50 से अधिक किसानों ने अपने-अपने ट्रैक्टर और डंपर व ट्राली किराए पर दिए हुए हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 406, 120 बी के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया है।
गिरोह का एक गुर्गा काबू, तीन ट्रैक्टर और डंपर बरामद
भट्टूकलां थाना अध्यक्ष ओमप्रकाश चुघ ने बताया कि जालसाजी और धोखाधड़ी से ट्रैक्टर हड़पने का एक बहुत बड़ा गिरोह सक्रिय है, जिसमें 6-7 लोग शामिल हैं। पुलिस ने गिरोह के एक गुर्गे को काबू किया है, जिससे रिमांड के दौरान तीन ट्रैक्टर बरामद कर लिए गए हैं, जो आगे बेच दिए गए थे। गिरोह का मुख्य सरगना नरेश चौबारा की धरपकड़ के लिए पुलिस अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दे रही है।
गिरोह ने षडयंत्र रचा: डीएसपी
डीएसपी सतेंद्र दहिया ने बताया कि किसानों को ट्रैक्टर और डंपर का ज्यादा किराया देने और लंबे समय तक परमाणु संयंत्र गोरखपुर में काम करने का भरोसा देकर एक शातिर गिरोह ने बड़ा षड्यंत्र रचा है, जिसका पुलिस जल्द ही पटाक्षेप करेगी। इस गिरोह ने जिले के कई गांवों के लोगों को ठगा है।
हमारा लेना-देना नहीं: प्लांट मैनेजर
परमाणु ऊर्जा संयंत्र के सीनियर मैनेजर होशियार सिंह ने बताया कि कंपनी टेंडर प्रणाली की अनिवार्यता को फॉलो करती है। टेंडर के बिना कोई भी काम किसी व्यक्ति विशेष को नहीं दिया जाता। इसलिए लोगों को किसी कार्य एवं नौकरियों के लिए किसी के झांसे में नहीं आना चाहिए। इस मामले से हमारा कोई लेना देना नहीं है। ऐसे ठगों से बचना चाहिए।