ऑनलाइन बिजनेस में बड़े मुनाफे का झांसा देकर छह लाख रुपये ठगने के आरोप में साइबर सेल ने मुंबई निवासी को गिरफ्तार किया है। मामले में दो आरोपी फरार हैं। साइबर सेल के इंचार्ज इंस्पेक्टर हरिंदर सेखों ने बताया कि पकड़े गए आरोपी की पहचान मुंबई स्थित आर्किड एन्क्लेव, क्यूनेट विहान सेलिंग इंडस्ट्रीज के कर्मचारी हुजेफा रंकवाला के रूप में हुई।
बुधवार को आरोपी को जिला अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड हासिल करेगी ताकि मामले में फरार चल रहे आरोपी अनिल राणा और आशीष भगत को पकड़ सके। हरिंदर सेखों ने बताया कि मोहाली निवासी देविंदर कुमार ने पुलिस को शिकायत में बताया था कि वह पिछले छह साल से सिप्ला लिमिटेड कंपनी में काम करता है। ऑनलाइन बिजनेस को लेकर उसकी अनिल राणा, आशीष भगत और क्यूनेट सेलिंग इंडस्ट्रीज़ के हुजेफा रंकवाला से सेक्टर 35 में मुलाकात हुई थी।
तीनों ने उसे पोर्टल के जरिए आनलाइन बिजनेस कर लाखों रुपये की कमाई के बारे में जानकारी दी। शिकायतकर्ता ने नगदी न होने से बिजनेस में रुपये निवेश करने से इंकार कर दिया। हुजेफा रंकवाला ने बताया था कि उसे निवेश करने के लिए पोर्टल और एक्सेस कोड दिया जाएगा, ताकि नया व्यक्ति अगर रुपये निवेश करेगा तो कमीशन उसके खाते में आ जाएगा।
साइबर सेल एक आरोपी को मुंबई से गिरफ्तार कर लाई, दो अब भी फरार
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अनिल राणा ने उसे फंसाया और कहा कि 2016 में उसने आनलाइन बिजनेस से तीन लाख 37 हजार ,दो लाख 50 हजार और दो लाख 70 हजार रुपये कमीशन कमाया है। तीनों के झांसे में आकर उसने हुजेफा के खाते में पहले एक लाख 95 हजार, अनिल राणा के खाते में दो लाख 91 हजार और आशीष भगत के अकाउंट में 27 हजार रुपये जमा करवा दिए।
जब देविंद्र सिंह ने उनसे कमीशन मांगा तो कहा गया कि आनलाइन बिजनेश में कमीशन पाने के लिए आगे से आगे लोगों को बिजनेस ज्वाइन करवाना होगा। वे जब इंवेस्ट करेंगे तब उसकेपास कमीशन आएगा। देविंदर ने बताया कि लाखों रुपये निवेश करने के बाद भी उसे कोई कमीशन नहीं मिली और न ही निवेश किए गए रुपये वापस मिले।
इसके बाद उसने मामले की शिकायत साइबर सेल में दी। पुलिस खातों व फोन की डिटेल खंगालते हुए आरोपी तक पहुंची और एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। वहीं दोनों आरोपियों की तलाश अब भी चल रही है। साइबर पुलिस का कहना है कि आनलाइन बिजेनस में निवेश करने के नाम पर ठगी करने वाले तीनों आरोपियों के खिलाफ साइबर सेल के पास करीब आठ शिकायत आ चुकी है और पूरा घोटाला करीब 40 लाख रुपये का है। वहीं देश में यह घोटाला अरबों में है।