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बिना सत्यापन ड्राइवर व नौकर रखना पड़ सकता भारी, होटल मालिक संग जो हुआ, वह एक सबक

Thu, 03 Dec 2020 06:51 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब)
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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पुलिस की सलाह को नजरअंदाज करना किस कदर भारी पड़ सकता है, इसका अंदाजा लुधियाना के होटल मालिक पंकज गुप्ता के दो वर्ष के बेटे के अपहरण से लगता है। बच्चे का अपहरण करने वाले ड्राइवर के खिलाफ हत्या, अपहरण, डकैती सहित अन्य अपराधों के छह मामले दर्ज हैं। बीते दो साल से यह शातिर अपराधी होटल मालिक के घर पर रह रहा था। ड्राइवर को रखने से पहले उसका पुलिस सत्यापन नहीं कराया गया था।

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गौरतलब है कि हर माह पुलिस आम लोगों को एक नोटिस जारी करती है। इसमें आम लोगों से अपने घर में ड्राइवर, नौकर, किराएदार रखने से पहले पुलिस सत्यापन करवाने के लिए कहा जाता है। इसका मकसद होता है कि अगर किसी व्यक्ति ने अपने घर में किसी अपराधी को रख लिया है तो पुलिस सत्यापन के दौरान उसकी सारी असलियत सामने आ सके। इससे न केवल लोगों को फायदा होता है, बल्कि पुलिस की सिरदर्दी भी कम होती है। पुलिस सत्यापन से ऐसे अपराधियों को आसानी से पहचान कर काबू किया जा सकता है। 


पांच मामले दर्ज हैं शातिर पर
होटल मालिक के बेटे का अपहरण करने का मुख्य आरोपी ड्राइवर हरिंदर पाल सिंह निवासी जिला फाजिल्का का रहने वाला है। इस शातिर पर राजस्थान, हरियाणा और पंजाब पांच मामले दर्ज है। पहला मामला पांच सितंबर 2006 को थाना सरहिंद में आईपीसी की धारा 407, 420, 201 के तहत दर्ज हुआ था। 
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इसके बाद थाना अरनीवाल में दो जून 2006 को 364, 323, 148, 149, 302 का मामला दर्ज हुआ था। इसी थाने में 10 जून को फिर से आरोपी के खिलाफ 411 के तहत तीसरा मामला दर्ज हुआ था। 19 मई 2010 को हरियाणा के रतिया थाने में आरोपी के  खिलाफ आईपीसी की धारा 395 व आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था। सबसे आखिरी मामला थाना सूरतगढ़ (राजस्थान) में डकैती का मामला दर्ज हुआ था।

इस अपहरण कांड के मुख्य आरोपी ड्राइवर हरिंदर पाल सिंह का पुलिस सत्यापन नहीं कराया गया था।  पुलिस हर बार लोगों से यही अपील करती है कि वह अपने घर में नौकर, ड्राइवर, किराएदार रखते समय पुलिस सत्यापन जरूर करवाएं। इसका मकसद अपराधी छवि के लोगों की पहचान करना होता है। परिवार ने पुलिस सत्यापन कराया होता तो इस मुसीबत से नहीं गुजरना पड़ता।  - राकेश अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर लुधियाना।

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