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फरलो के विरोध में याचिका: राम रहीम हार्डकोर क्रिमिनल है या नहीं शुक्रवार को तय करेगा हाईकोर्ट

Thu, 24 Feb 2022 02:13 AM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़

सार

बुधवार को याचिकाकर्ता पक्ष ने अपनी दलील में कहा कि राम रहीम हार्डकोर अपराधी है। हरियाणा सरकार और राम रहीम ने याची पक्ष की दलीलों का विरोध किया।
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राम रहीम - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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राम रहीम की फरलो के विरोध में दाखिल याचिका ने अब नया मोड़ ले लिया है। अब हाईकोर्ट में इस बात पर बहस छिड़ गई है कि राम रहीम हार्डकोर अपराधी है या नहीं। इस विषय पर बुधवार को बहस पूरी नहीं हो सकी और इस केस को अब शुक्रवार को सुना जाएगा। बुधवार को मामले की सुनवाई आरंभ होते ही हरियाणा सरकार ने अपना जवाब दायर कर कहा कि डेरा मुखी पर हत्या की साजिश रचने का आरोप है और वह सीधे तौर पर हत्यारा नहीं है। ऐसे में उसे हार्डकोर अपराधी नहीं कहा जा सकता।

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इसके साथ ही यह भी बताया कि यदि कोई हार्डकोर अपराधी भी हो तो उसे 5 वर्ष की सजा पूरी होने के बाद फरलो का अधिकार है। हरियाणा के एजी ने भी अपनी कानूनी राय सरकार को देते हुए कहा था कि राम रहीम हार्डकोर क्रिमिनल नहीं है। हाईकोर्ट ने सरकार के इस जवाब पर कहा कि सरकार ऐसी कोई जजमेंट पेश करे जिसके तहत यह साबित हो सके कि डेरा मुखी को हार्डकोर क्रिमिनल नहीं माना सकता।

इस दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि राम रहीम को आईपीसी की धारा 120बी और 302 के तहत दोषी करार दिया गया है और ऐसे में वह हत्यारा है। वह हार्डकोर अपराधी है। साथ ही यह भी बताया कि वह 2021 में हार्डकोर अपराधी बना था और हार्डकोर अपराधी बनने के 5 साल बाद ही उसे फरलो का लाभ दिया जा सकता है। इस दौरान कोर्ट का समय पूरा हो गया। ऐसे में अब शुक्रवार को राम रहीम के हार्डकोर अपराधी होने के मुद्दे पर बहस होगी।
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डेरा मुखी को दी गई फरलो के खिलाफ पटियाला के भादसों निवासी परमजीत सिंह सहोली ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि राम रहीम को कई संगीन अपराधों का दोषी करार दिया जा चुका है और सुनारिया जेल में सजा काट रहा है। इसके अलावा उसके खिलाफ कुछ आपराधिक मामले अभी भी अदालतों में चल रहे हैं।

बावजूद इसके हरियाणा सरकार ने डेरा प्रमुख को 7 फरवरी से 27 फरवरी तक 20 दिनों की फरलो दे दी। याची ने कहा था कि पंजाब विधानसभा के 20 फरवरी को चुनाव होने जा रहे हैं, ऐसे में ठीक इन चुनावों से पहले डेरा मुखी को फरलो राजनैतिक लाभ उठाने के लिए ही दी गई है। ऐसे में डेरा मुखी की फरलो के आदेश रद्द करने की हाईकोर्ट से मांग की गई है।

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