कुछ माह पहले ही उन्होंने अपने मोबाइल से कुल 60 हजार रुपये की दवाइयां खरीदी थीं। इसी दौरान उनके मोबाइल पर हिमांशु नाम के शख्स का फोन आया खुद को संस्था से जुड़ा हुआ बताते हुए कहा कि यदि आपके गठिया या जोड़ो में आराम न हुआ तो आपको ब्याज सहित पैसे वापस कर दिए जाएंगे। इसके बाद हिमांशु ने कहा कि इसके जरिये वे अपना इंश्योरेंस क्लेम भी ले सकते हैं। जिसके क्लेम के रूप में उन्हें आठ लाख 80 हजार रुपये दिए जाएंगे।
शातिर आरोपी ने बदले में सेवानिवृत्त डीजीपी से इंश्योरेंस के प्रीमियम के 382170 रुपये अपने साथी ठग रामकुमार के खाते में डलवा लिए लेकिन उन्हें बीमा नहीं मिला। सेवानिवृत्त डीजीपी लगातार हिमांशु और राजकुमार को फोन करते रहे लेकिन दोनों के मोबाइल बंद मिले। उसके बाद उन्होंने 22 फरवरी को आरोपियों पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया।
जनवरी में ही साइबर थाना का गठन हुआ था, जिसमें रेवाड़ी जिले के अलावा महेंद्रगढ़, पलवल व नूहं जिले के साइबर क्राइम संबंधित मुकदमा दर्ज कर जांच की जाती है। थाना गठन होने के कुछ दिन बाद ही धोखाधड़ी की यह बड़ी शिकायत दर्ज हुई थी। साइबर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बाद जांच में आधार कार्ड के नंबर से आरोपियों का पता लगाकर मंगलवार रात को दो आरोपियों रामकुमार व शुभम को लखनऊ से गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को दो दिन के रिमांड पर लिया गया है।
शुभम ने चुराया था डाटा
साइबर थाना पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी शुभम दिल्ली में कोरियर से दवाइयां सप्लाई करने का काम करता था। जिस कंपनी से रिटायर डीजीपी ने दवाइयां बुक की थीं, उसी कंपनी का डाटा निकालकर उसने धोखाधड़ी का खेल शुरू किया था। साथ ही जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी शुभम ने रामकुमार के नाम से फर्जी आईडी बनाकर धोखाधड़ी में इस्तेमाल करता था। आरोपियों के कब्जे से वो मोबाइल सिम भी बरामद कर ली गई है, जिसके जरिये उन्होंने सेवानिवृत्त डीजीपी के साथ धोखाधड़ी की थी। साथ ही तीन लाख रुपये की नकदी भी बरामद की गई है।
पुलिस ने आरोपियों को मंगलवार रात को गिरफ्तार किया था। कोर्ट में पेश कर रिमांड लिया गया था। पुलिस साइबर अपराध करने वालों को किसी भी सूरत में नहीं बख्शेगी। - ऋषिकांत, एसएचओ साइबर थाना।