हिमाचल प्रदेश के चंबा जिला के गांव प्रियुगल निवासी रमेश कुमार दिल्ली में प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है। रमेश कुमार के अनुसार उन्होंने अपने घर जाने के लिए एसी कोच के बी-तीन में तीन सीट आरक्षित करवाई थी।
रात करीब डेढ़ बजे गेट के ठीक पास उनकी पत्नी व डेढ साल का बेटा सो रहे थे। एक सीट पर उनकी आठ साल की बेटी और एक सीट पर वे खुद सो रहे थे।
जींद से चलने के करीब दस मिनट बाद गाड़ी रुक गई। इसी दौरान एक व्यक्ति ने चाकू की नोक पर उनकी पत्नी के साथ लूटपाट की। किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचने के लिए पत्नी ने जेवर पहले ही एक हैंड बैग में रख दिए थे।
लुटेरे यह बैग ले गए। इसके बाद उन्होंने एक दूसरी महिला के हाथ से पर्स छपटा, जिससे उसने हल्ला मचा दिया और इस पर ट्रेन में सो रहे लोग जागे तो देखा कि दो नकाबपोश युवक भाग रहे हैं।
इसके दस मिनट बाद ट्रेन चल पड़ी। उन्होंने पठानकोट पहुंच कर पुलिस को शिकायत दी। इसमें रमेश की पत्नी से लूटे गए बैग से तीन सोने की अंगूठी, एक गले की सोने की चेन, सोने के दो कानों के झुमके, 4350 रुपये की नकदी व 25 हजार रुपये के अन्य सामान से हाथ धोना पड़ा। वहीं रमेश कुमार पीड़ित ने बताया कि इस पूरे मामले में रेलवे की घोर लापरवाही सामने आई है।
मेरा परिवार खतरे में रहा है। यदि यह सब जनरल बोगी में होता तो समझ आता है लेकिन एसी कोच में सुरक्षा की कलई खुली है। मेरे बच्चे अभी तक डरे हुए हैं। इसका जवाब और भरपाई रेलवे को करना होगा।
लंबे समय से सक्रिय है गिरोह
आरपीएफ के बाद हालांकि पकड़े गए गिरोह में से एक युवक पानीपत के जाटलान रोड निवासी संदीप ने स्वीकारा है कि वह सात मई वाली घटना में शामिल था। इसके अलावा पकड़े गए सांपला के वार्ड नंबर एक निवासी विवेक, रोहतक के माता दरवाजा निवासी रमन, रोहतक की बालकनाथ कॉलोनी निवासी भारत पहले वाली घटना में शामिल नहीं रहे है।
पिछले दिनों कुछ घटनाएं हुई, जिसके बाद आरपीएफ काफी सतर्क थी। सोमवार रात को सूचना मिली कि इस प्रकार की घटना हो सकती है। इस पर आरपीएफ ने पूरी तैयारी के साथ जाल बिछाया और चार आरोपियों को काबू कर लिया है। मुख्य आरोपी बड़ौदी गांव निवासी मोजी व उसके दो ओर साथी अभी फरार हैं। जल्द ही काबू कर लिया जाएगा। -सुरेश कुमार, थाना प्रभारी, आरपीएफ, जींद।