आरोपी इतने बड़े स्तर पर ठगी करते थे कि उन्होंने नोट गिनने के लिए मशीनें रखनी पड़ी। जब पुलिस को इस बात की सूचना मिली तो पुलिस ने जांच शुरू कर दी। जांच के दौरान पुलिस ने ओंकार हनी को कोठी वाले दफ्तर से गिरफ्तार किया। उसके बाद कुशल कुमार और सेठी को फिरोज गांधी मार्केट से गिरफ्तार किया। आरोपियों से पूछताछ के बाद दिनेश कुमार और विवेक को नामजद कर उन्हें मिल्लरगंज स्थित उनके दफ्तर से गिरफ्तार किया, जहां दोनों काम करते थे।
शेयर मार्केट की कंपनियों की आईडी का इस्तेमाल
पूछताछ में पता चला कि शेयर मार्केट की कंपनियों की आईडी के माध्यम से लोगों को धोखे में रखकर बिना किसी लाइसेंस या रजिस्टर्ड नंबर के स्टॉक मार्केट में रुपये लगाते थे। इसके अलावा लोगों को बेटिंग एप के माध्यम से सट्टा लगवाने का काम करते हुए लोगों से मोटी रकम ऐंठकर धोखाधड़ी करते थे। जेसीपी सौम्या मिश्रा ने बताया कि आरोपियों के जाल में फंसने वाले लोगों में से अधिकतर 90 फीसदी लोगों को उनके रुपयों का नुकसान होने के बारे में बताकर रकम खुद हड़प लेते थे। इसके अलावा बेटिंग एप उपयोग करने वाले व्यक्ति को कुछ कमीशन देने का भी झांसा देते थे।