पंजाब के बठिंडा जिले के गांव बाजक में एक किसान ने सोमवार को जहर निगल खुदकुशी कर ली। खुदकुशी कारण गेहूं की कम पैदावार को बताया जा रहा है। मृतक की पहचान रमनदीप सिंह के तौर पर हुई है। मृतक अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गया है। जानकारी के अनुसार किसान रमनदीप सिंह ने गांव बाजक में ही 16 एकड़ जमीन ठेके पर ले रखी थी।
पिछले कई वर्षो से किसान उक्त जमीन पर खेती करता आ रहा था। इस बार किसान ने गेहूं की फसल बोई थी। कुछ दिन पहले ही फसल काटी थी। इस बार गेहूं की कम पैदावार से उसे बड़ा नुकसान हुआ। भाई जगवीर सिंह के अनुसार इस वजह से रमनदीप सिंह परेशान चला रहा था। इसी परेशानी कारण उसने सोमवार को जहर निगलकर खुदकुशी कर ली। मृतक के भाई जगवीर सिंह ने जिला प्रशासन एवं सरकार से मांग की है कि मृतक पर जो कर्ज था उसको भी माफ किया जाए और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए।
एमएसपी की गारंटी और कम पैदावार के एवज में बोनस दे केंद्र: किसान
एमएसपी की कानूनी गारंटी और कम झाड़ के एवज में 500 रुपये प्रति क्विंटल बोनस की मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर बड़ी संख्या में किसानों ने पटियाला में डीसी दफ्तर के आगे सोमवार को धरना दिया। डीसी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन भेजा। क्रांतिकारी किसान यूनियन के प्रदेश वित्त सचिव गुरमीत सिंह दित्तूपुर, जिला प्रधान जंग सिंह भटेडी, सन्नौर ब्लाक प्रधान सुखविंदर सिंह तुलेवाल, क्रांतिकारी किसान यूनियन के जिला प्रधान रणजीत सिंह सवाजपुर ने कहा कि केंद्र ने सभी फसलों की एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी देने का वादा किया था। अब सरकार अपने इस वादे से भाग रही है। उन्होंने मांग की है कि केंद्र किसानों की सभी फसलों की सरकारी खरीद की जिम्मेदारी तय करने वाला कानून बनाए। गेहूं और धान के अलावा सब्जियों, फलों, दूध व मछली के लिए एमएसपी दी जाए।
उन्होंने आगे कहा कि मंडियों में जहां भी प्राइवेट व्यापारी फसलें खरीदे, यह यकीनी बनाया जाए कि उसकी बोली घोषित एमएसपी मूल्य से शुरू हो। पहले बेमौसमी बारिश और फिर मार्च में ज्यादा गरमी पड़ने से इस बार गेहूं की कम पैदावार हुई। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते प्राइवेट मंडी में गेहूं का भाव बढ़ गया है। इसीलिए मांग की जाती है कि सरकार किसानों को 500 रुपये प्रति क्विंटल बोनस का तुरंत एलान करे।