विजिलेंस को दी शिकायत में किसान पलविंदर सिंह ने बताया कि उसने अपनी 18 एकड़ की एक पैतृक संपत्ति को बीते वर्ष बेचा था। पैतृक संपत्ति बेचने के कुछ दिन बाद 12 अगस्त 2023 को उसे एक नोटिस मिला कि जो जमीन उसने बेची है, वह पंचायती जमीन है। दरअसल, यह नोटिस भी फर्जी विजिलेंस अधिकारी बने आरोपी ने ही भेजा था।
नोटिस मिलने के कुछ दिन बाद पलविंदर सिंह ने बताया कि उसके घर तीन लोग आए। उन्होंने खुद को सेक्टर-17 चंडीगढ़ स्थित विजिलेंस विभाग के अधिकारी के रूप में अपनी पहचान बताई। यह सुनकर शिकायतकर्ता पलविंदर सिंह घबरा गया। उसने फर्जी विजिलेंस अधिकारी बनकर आए लोगों से नोटिस के बारे में पूछा। इस पर आरोपी पिंदर सोढी और उसके साथियों ने किसान को इस मामले के रफादफा करने की एवज में 25 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की। इस पर शिकायतकर्ता ने आरोपियों को 15 और 10 लाख रुपये के दो चेक और 27 हजार रुपये नकद दे दिए।
आरोपियों ने पलविंदर सिंह से यह चेक तब वापस लेने को कहा जब वह 25 लाख रुपये नकद देता। इस मामले की पूछताछ करते हुए जब शिकायतकर्ता पलविंदर सिंह असली विजिलेंस अधिकारियों के संपर्क में आया तो उसे धोखाधड़ी का पता चला।
अगस्त में विजिलेंस ने दर्ज किया था मामला
विजिलेंस ने मिली शिकायत पर 28 अगस्त 2023 को इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी। गांव भैनी सालू निवासी मनजीत सिंह और चार अन्य अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध विजिलेंस ब्यूरो के थाना लुधियाना रेंज में मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में आरोपी मनजीत सिंह और परमजीत सिंह निवासी गांव मेहलों, तहसील समराला और परमिंदर सिंह निवासी आकाश कॉलोनी होशियारपुर की पहले ही गिरफ्तारी हो चुकी है। मुख्य आरोपी पिंदर सोढी और हरदीप सिंह निवासी खमाणों फरार थे। उसे इस साल जनवरी में अदालत ने पीओ (भगोड़ा) घोषित कर दिया था।