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सतलोक आश्रम में नक्सलियों के होने के सबूत

Mon, 24 Nov 2014 05:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
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सतलोक आश्रम में नक्सलियों का आना-जाना था। यह खुलासा डीजीपी एसएन वशिष्ठ ने प्रेस कांफ्रेंस में किया। गिरफ्तारी के पांचवें दिन रविवार को जब सतलोक आश्रम प्रमुख रामपाल को निशानदेही के लिए वहां ले जाया गया। तो पुलिस को इस बात के सबूत मिले। तलाशी अभियान के दौरान पुलिस ने आश्रम के तहखाने से दस राइफल, चार एयरगन, एक बंदूक और कुछ कारतूस बरामद किए हैं।
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इस दौरान मौके पर मौजूद रहे डीजीपी एसएन वशिष्ठ ने बताया कि आश्रम में नक्सलियों के होने के भी सबूत मिले हैं। आश्रम में जितने भी हथियार मिले हैं, उनके लाइसेंसों की भी जांच की जाएगी। तलाशी के लिए आश्रम में करीब पौने घंटे तक डीजीपी एसएन वशिष्ठ भी मौजूद रहे।

ड्यूटी मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में रामपाल से पूरे आश्रम में संदिग्ध स्थानों की निशानदेही करवाई गई। आश्रम से पुलिस की टीम ने 10 राइफल, 4 एयरगन, एक बंदूक और 14 कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस ने बताया है कि ये हथियार भी रामपाल की गद्दी के आसपास छिपे मिले हैं।
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पुलिस ने बताया है कि रमेश कुमार निवासी पेटवाड़, सिद्धार्थ निवासी हिसार, रविंद्र निवासी रोहतक, धर्मेन्द्र निवासी करौंथा से एक-एक एयरगन व एक-एक कमांडो ड्रेस बरामद की गई है । इसके अलावा विजेंद्र निवासी नयाबास से एक लाठी, रामवतार सिंह धीरनवास से एक 12 बोर की बंदूक और 12 बोर के 5 कारतूस मिले हैं। पुलिस इन लोगों को भी जांच के लिए आश्रम लाई थी।

चार दिन के रिमांड पर लिया

पुलिस ने रामपाल के राजदार रामकंवर ढाका, प्रबंधक बलजीत, राम अवतार राणा धीरणवास, धर्मेंद्र करौंथा, जितेंद्र गन्नौर, रमेश चंद्र रोहतक, रविंद्र सुडाणा, पुरुषोत्तम सैनी कुरुक्षेत्र, हिसार निवासी सिद्धार्थ बिशभनोई को तीन दिन की रिमांड के बाद कोर्ट में पेश किया। यहां बलजीत, पुरुषोत्तम और रामकंवर ढाका को पुलिस ने फिर से चार दिन के रिमांड पर लिया है। इनके अलावा अग्रोहा थाना से 31 लोगों को पेश किया गया। कोर्ट ने इन अभियुक्तों को जेल भेज दिया है।

तीन खास राजदारों का फिर रिमांड
सतलोक आश्रम के तथाकथित संत रामपाल के तीन खास राजदारों को पुलिस दोबारा इंटेरोगेट करेगी। पुलिस ने रविवार को जिन नौ राजदारों को कोर्ट में पेश किया था, उनमें से तीन उन राजदारों का दोबारा रिमांड हासिल किया है, जिन्होंने रामपाल के साथ आश्रम की कार्यविधि में खास भूमिका निभाई।

पुलिस की मानें तो रामकुमार उर्फ रामकंवर ढाका, बलजीत और पुरुषोत्तम दास ये वे शख्स हैं, जो रामपाल के खास सहयोगी थे। ये ट्रस्ट कमेटी के मुख्य सदस्य थे, जिनसे पूछताछ करना अभी और बाकी है। पुलिस के विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि ये और बड़े खुलासे कर सकते हैं।
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रामपाल के बाद बलजीत था सर्वेसर्वा

पुलिस की अभी तक की जांच में सामने आया है। रामपाल के बाद बलजीत आश्रम में सर्वेसर्वा था। वह पढ़ा-लिखा था और उसके प्रबंधन का ज्ञान था। उसकी बेटी बबीता भी रामपाल की खास साधक थी, जो फिलहाल हिसार सेंट्रल जेल में है।

पुलिस ने उसे भी आश्रम से ही गिरफ्तार किया था। यह भी बताया गया है कि बरवाला का बलजीत कुछ दिन हिसार में अनाज मंडी में एक किराये के मकान पर रहा था। करीब सात-आठ साल पहले बलजीत और उसके पार्टनर धर्मबीर ने प्रॉपर्टी डीलिंग का काम शुरू किया था। इसके बाद दोनों के संपर्क रामपाल से हो गए और वे इसका प्रबंधन का कार्य देखने लगे।

रामकंवर उर्फ रामकुमार ढाका सुडाना निवासी जिला झज्जर का रहने वाला है। वह रिटायर्ड टीचर है। रामकंवर आरएसएसएस का मुखी और रामपाल का विशेष सलाहकार है। इसके साथ सिद्धार्थ भी है, जो कमांडो को पूर्व सैनिकों और पुलिस कर्मचारियों के सहयोग से ट्रेनिंग देने की जिम्मेदारी उठाता है।

पुरुषोत्तम सैनी भी रामपाल ट्रस्ट का खास मेंबर है। वह आश्रम की राशि से को रियल एस्टेट के कारोबार में लगाता और उससे होने वाली आय का ब्योरा रखता था। आश्रम में आने वाले दान का हिसाब-किताब पूरा उसके पास था। वह फाइनेंसियल मैनेजमेंट का एक्सपर्ट है और कहां रुपये इनवेस्टमेंट करने हैं, कहां से आय होगी, इसका फैसला लेने में समर्थ था।
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