केंद्र सरकार ने 25 अगस्त को बासमती का मिनिमम एक्सपोर्ट प्राइस 1200 डॉलर प्रति टन तय कर दिया था। इससे निर्यातक काफी परेशान थे, क्योंकि निर्यात पर बुरा असर पड़ रहा था। निर्यातकों के साथ जूम मीटिंग में 25 सितंबर को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एमईपी कम करके 850 डॉलर प्रति टन करने का भरोसा दिलाया था लेकिन सरकार ने 14 अक्तूबर को 1200 एमईपी का एलान कर दिया।
मंत्रालय ने सोमवार देर रात फिर बैठक बुलाई और पीयूष गोयल ने एमईपी को कम करके 950 डॉलर करने का एलान किया। बैठक में ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विजय सेतिया, एक्सपोर्टर राजीव सेतिया, अरविंदर पाल सिंह, रमनीक सिंह, पंजाब के प्रधान अशोक सेठी और सुशील जैन मौजूद रहे। पंजाब बासमती एक्सपोर्टर एसोसिएशन के प्रधान अशोक सेठी ने कहा कि सरकार के इस फैसले से किसानों की आय में सुधार होगा। देश से निर्यात बढ़ेगा।
सेठी ने बताया कि सरकार चाहती है कि घरेलू बाजार में चावल की कीमतें नियंत्रण में रहे। उपभोक्ताओं के लिहाज से यह मंशा बहुत अच्छी है। लेकिन असलियत यह है कि घरेलू बाजार में महंगाई बढ़ाने में बासमती का कोई खास योगदान नहीं है क्योंकि 80 फीसदी बासमती चावल निर्यात होता है। देश में आंकड़े इस बात के गवाह है कि मुश्किल से 60 लाख टन बासमती चावल की पैदावार होती है। यानी कुल चावल उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी सिर्फ 4.5 फीसदी के आसपास है।