चंडीगढ़ की पुनर्वास कॉलोनियों में चल रहे सर्वेक्षण को लेकर सियासी दलों में श्रेय की जंग शुरू हो गई है। उपायुक्त के स्पष्टीकरण के बाद भाजपा ने आप और कांग्रेस पर निशाना साधा है। लाभार्थियों को कॉलोनियों का मालिकाना हक दिलवाने के मुद्दे को भुनाने में खासकर भाजपा कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।
जाहिर तौर पर अगर सर्वे के बाद प्रशासन इस पर कोई सकारात्मक निर्णय लेता है तो इसका सियासी लाभ भाजपा लेना चाहेगी। इस तरह की अटकलों को लेकर चंडीगढ़ के डीसी की ओर से बयान जारी करने के बावजूद भाजपा अपने स्टैंड पर कायम है। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि भाजपा महज वोट बैंक की खातिर लोगों को गुमराह कर रही है। अगर ऐसा है तो लाभार्थियों के हाथ में पहले मालिकाना हक मिलने का पत्र थमाएं।
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अरुण सूद पहले दिन से मैदान में हैं
गौर हो कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद इस मुद्दे पर पहले दिन से ही मैदान में हैं और इस बात का जमकर प्रचार कर रहे हैं कि पुनर्वास कॉलोनियों में रह रहे लोगों को उनका मालिकाना हक सर्वेक्षण के साथ ही मिल चुका है। भाजपा अध्यक्ष ने बाकायदा चंडीगढ़ सलाहकार परिषद की बैठक से एक दिन पहले ही इस आशय की घोषणा कर डाली थी।
भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने अरुण सूद की अध्यक्षता में प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित से सलाहकार परिषद की बैठक से एक शाम पहले मुलाकात कर स्वामित्व के मुद्दे पर शीघ्र कार्रवाई करने और अनुदान देने की मांग की थी। इस दौरान उनके साथ शहर के मेयर सहित पाटी के संगठन महासचिव और दो महासचिव शामिल थे। भाजपा अध्यक्ष अरुण सूद का दावा है कि प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि सर्वेक्षण के बाद जमीनी स्थिति ज्ञात हो जाती है, सर्वेक्षण के बाद जिसके पास वैध दस्तावेज होंगे उसे मालिकाना हक मिलेगा, इसमें कोई अस्पष्टता नहीं है।
दशकों पुरानी मांग पूरी होने के फैसले से आप-कांग्रेस गठबंधन बौखलाया
आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पुनर्वास कॉलोनियों में मालिकाना हक की प्रक्रिया में बाधा और भ्रम पैदा कर रहे हैं। पुनर्वास कॉलोनियों में मालिकाना हक दिए जाने और दशकों पुरानी मांग पूरी होने के फैसले से आप कांग्रेस गठबंधन बौखला गया है और लोगों को डरा रहा है। चंडीगढ़ के उपायुक्त ने केवल उन तथ्यों को कहा है जो पहले से ही सार्वजनिक हैं कि 18 अगस्त 2023 के बाद किसी भी बिक्री या खरीद पर विचार नहीं किया जाएगा। कॉलोनियों की वास्तविक स्थिति वैसी ही रहेगी और किसी को विस्थापित नहीं किया जाएगा। उपायुक्त के बयान में इस बात का कोई उल्लेख नहीं है कि सभी सर्वेक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसी को भी मालिकाना हक नहीं मिलेगा, जो कि सर्वेक्षण पूरा होने के बाद स्वाभाविक कार्रवाई है। लोग किसी भी गलत सूचना अभियान पर भरोसा न करें और सफल सर्वेक्षण के लिए प्रशासन के साथ सहयोग करें।
-अरुण सूद, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष
भाजपा की हालत शादी तय हुई नहीं और बाराती पहले पहुंचे जैसी
भाजपा को हर काम का श्रेय लेने की आदत है। पुनर्वास कॉलोनियों के सर्वेक्षण से पहले कांग्रेस ने प्रशासन के समक्ष यह मामला उठाया था। इसके बाद यह सर्वेक्षण शुरू किया गया। भाजपा की हालत ठीक वैसी है कि शादी तय नहीं हुई और बाराती पहले पहुंच गए। भाजपा के लोग ढोल बजाकर अगर इस बात का ढिंढोरा पीट रहे हैं कि पुनर्वास कॉलोनियों के लोगों को उनका मालिकाना हक मिल गया है तो उनके हाथ में इसका पत्र क्यों नहीं थमाते। दरअसल भाजपा वोट बैंक की खातिर लोगों को गुमराह करने पर उतर आई है। कांग्रेस भी चाहती है कि लोगों को उनका मालिकाना हक मिले, लेकिन इसमें किसी तरह की भ्रम की स्थिति नहीं होनी चाहिए।
-एचएस लक्की, चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष