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ऑक्सफोर्ड की कोविड शील्ड वैक्सीन का ट्रायल पीजीआई में होगा, 300 लोगों की होगी स्क्रीनिंग

Fri, 21 Aug 2020 02:33 PM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर
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कोरोना से बचाव के लिए ऑक्सफोर्ड की ईजाद वैक्सीन कोविड शील्ड के ट्रायल के लिए पीजीआई की एथिकल कमेटी ने अनुमति दे दी है। इसके लिए जल्द ही स्टाफ की ट्रेनिंग और विज्ञापन जारी किया जाएगा। उम्मीद है कि अगस्त के अंत तक ट्रायल शुरू हो जाएगा। यह जानकारी पीजीआई में इस प्रोजेक्ट की प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर कम्युनिटी मेडिसिन की डॉ. मधु ने दी।
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उन्होंने बताया कि पुणे की सिरम इंस्टीट्यूट की ओर से बनाई जा रही इस वैक्सीन का पीजीआई समेत देश के 17 सेंटरों में ट्रायल किया जाएगा। इन सेंटरों में दिल्ली एम्स, पुणे एबीजे मेडिकल कॉलेज, पटना में राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आरएमआरआईएमएस), जोधपुर में एम्स, गोरखपुर में नेहरू अस्पताल, विशाखापतनम में आंध्र मेडिकल कॉलेज और मैसूर में जेएसएस एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च भी शामिल हैं।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के साथ मिलकर किए जा रहे शोध में इस ट्रायल के परिणाम के बाद ही कोरोना के इलाज की सफलता को आंका जा सकेगा। पीजीआई ने इसके लिए 2 अगस्त को अनुमति दे दी थी। इसके बाद इसका प्रपोजल बनाकर पीजीआई की एथिकल कमेटी को भेजा गया था। वहां से भी स्वीकृति मिल गई है। डॉ. मधु ने बताया कि विज्ञापन जारी करने के साथ ही इसकी सूचना पीजीआई की वेबसाइट पर भी दी जाएगी।
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सिक्योरिटी ट्रायल से होगी शुरुआत

डॉ. मधु ने बताया कि ऑक्सफोर्ड में वैक्सीन का सिक्योरिटी ट्रायल पूरा किया जा चुका है, लेकिन पीजीआई ट्रायल के दौरान सबसे पहले सिक्योरिटी फेस पूरा करने के बाद ही उसका ह्यूमन ट्रायल शुरू करेगा। उसके लिए एथिकल कमेटी से अप्रूवल मिलने के बाद विज्ञापन जारी किया जाएगा। रुचि रखने वाले वॉलिंटियरों को पीजीआई मेडिकल चेकअप के बाद ट्रायल में शामिल करेगा।

ट्रायल में शामिल होने वाले व्यक्ति की उम्र 18 साल से ज्यादा होनी चाहिए। उसका स्वस्थ होना और कोरोना संक्रमित न होना बेहद जरूरी है। ट्रायल से पहले उसके सारे मेडिकल चेकअप किए जाएंगे। रिपोर्ट मानक के अनुरूप आने के बाद ही उसे ट्रायल में शामिल किया जाएगा। उसके बाद वैक्सीन लगाया जाएगा। इसका लगातार फॉलोअप किया जाएगा। उन लोगों को अलग से डायरी दी जाएगी, जिसमें उन्हें महत्वपूर्ण बिंदुओं को नोट करना होगा।

इसे बाद में पीजीआई अपने ट्रायल की रिपोर्ट में शामिल करेगा। ट्रायल के दौरान यह चेक किया जाएगा कि वैक्सीन देने के बाद उन लोगों में एंटीबॉडी बन रही है या नहीं। डॉ. मधु ने बताया कि इसमें पॉजिटिव मरीजों को इसलिए शामिल नहीं किया जा रहा है क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि कोरोना पॉजिटिव होने के बाद ठीक हो चुके मरीजों में खुद ही एंटीबॉडीज बन चुकी होगी।

300 लोगों की होगी स्क्रीनिंग
ट्रायल को शुरू करने से पहले वालंटियरों के चयन के लिए 300 लोगों की स्क्रीनिंग की जाएगी। उनमें से 250 लोगों को चुना जाएगा। डॉ. मधु ने बताया कि अगस्त के अंत तक इसका ट्रायल शुरू हो जाएगा। इसमें कम्युनिटी मेडिसिन के साथ ही वायरोलॉजी, फार्मोकोलॉजी, इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट के विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। इस ट्रायल को पूरा होने में 6 महीने का समय लगेगा।
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