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'रोहतक सिस्टर्स' के साथ छेड़छाड़ केस में कोर्ट का बड़ा फैसला, ये रहा पूरा घटनाक्रम

Sun, 05 Mar 2017 09:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
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रोहतक सिस्टर्स
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चलती बस में दो बहनों के साथ छेड़छाड़ के बहुचर्चित केस में अदालत ने शुक्रवार का दो साल, तीन महीने और तीन दिन बाद बड़ा फैसला सुनाया। घटना सवा दो साल पहले की है। गांव आसन के जिन तीन युवकों पर आरोप लगे थे, उन्हें अदालत ने ठोस सबूतों के अभाव में आरोप मुक्त कर दिया। सोनीपत की रहने वाली पूजा और आरती रोहतक के कॉलेज में पढ़ती थीं।
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दोनों बहनों द्वारा बस में ही तीनों लड़कों की बेल्ट से पिटाई का वीडियो वारयल होने के बाद यह मामला देश ही नहीं अंतरराष्ट्रीय मीडिया भी छा गया था। मामला 28 नवंबर 2014 का है और वीडियो 30 नवंबर को वायरल हुआ था। एसीजेएम हरीश गोयल की अदालत ने 40 गवाहों और लाई डिटेक्टर टेस्ट की रिपोर्ट के आधार पर रोहतक के गांव आसन निवासी युवकों को आरोप मुक्त कर दिया। ये युवक फिलहाल जमानत पर हैं।

सोनीपत जिले के गांव थाना निवासी पूजा और आरती ने गांव भालौठ के पास चलती बस में छेड़छाड़ और मारपीट का आरोप लगाते हुए कुलदीप, मोहित और दीपक के खिलाफ केस दर्ज कराया था। मारपीट का वीडियो वायरल होने के बाद मामला काफी चर्चित हो गया था। इसके बाद पुलिस ने युवकों को गिरफ्तार किया था। हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।
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वीडियो में बेल्ट से पीट रही हैं लड़कों को

रोहतक सिस्टर्स
वीडियो में पूजा और आरती चलती बस में तीन युवकों को बेल्ट और लात-घूंसों से पीटती नजर आई थीं। सोशल मीडिया पर वीडिया वायरल होते ही दोनों  बहनें देश और विदेश के मीडिया में रोल मॉडल बन गईं थी। प्रदेश सरकार ने भी दोनों बहनों को बहादुरी पुरस्कार देने की घोषणा की थी। हालांकि, बाद में एक और वीडियो वायरल होने के बाद सरकार ने पुरस्कार देने से मना कर दिया था।

जांच के लिए गठित की थी एसआईटी
पुलिस ने इस मामले को तूल पकड़ता देख जांच के लिए एसआईटी गठित की थी। हालांकि एसआईटी ने 19 अगस्त को सौंपी स्टेटस रिपोर्ट में तीनों युवकों को क्लीन चिट दे दी थी और लड़कियों के आरोप निराधार बताए थे। इस पर पूजा और आरती ने एसआईटी की स्टेटस रिपोर्ट पर सवाल उठाए थे। इसके बाद से जांच स्टेट क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई थी। फैसला सुनाने के दौरान अदालत ने वीडियो को आधार नहीं माना।

सभी गवाहों के बयान तीनों युवकों के पक्ष में
एसआईटी ने डीएसपी यशपाल खटाना के नेतृत्व में मामले की जांच की। घटना के समय की मोबाइल लोकेशन और बस की टिकटों के आधार पर पता लगाया गया कि बस में कौन-कौन सवार थे। इसके बाद 40 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। सभी गवाहों के बयान में लड़कियों को ही कसूरवार बताया गया।

गवाहों ने बताया कि लड़कियों के साथ छेड़छाड़ जैसी घटना हुई ही नहीं। इसके बाद अदालत के आदेश पर आरोपियों और दोनों बहनों का लाई डिटेक्टर टेस्ट सीबीआई की दिल्ली लेबोरेट्री में किया गया। इस टेस्ट में भी लड़कियां झूठी और लड़के सही पाए गए।

दोनों बहनें कर सकती हैं सेशन कोर्ट में रिवीजन फाइल

रोहतक सिस्टर्स
आरोपी पक्ष के वकील प्रदीप मलिक का कहना है कि एसीजेएम कोर्ट से आरोप मुक्त होने के बाद एक बार यह मामला खत्म हो गया है। लेकिन एसीजेएम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दोनों बहनें सेशन कोर्ट में रिवीजन फाइल कर सकती हैं। सेशन कोर्ट को एसीजेएम कोर्ट का फैसला गलत लगता है तो सेशन कोर्ट चार्ज फ्रेम करने के आदेश जारी कर सकती है।

लड़के कर सकते हैं मानहानि का दावा
प्रदीप मलिक का कहना है कि इस मामले में आरोपी रहे आसन निवासी कुलदीप, मोहित और दीपक अब दोनों बहनों के खिलाफ अदालत में मानहानि का केस फाइल कर सकते हैं। कुलदीप कोर्ट के माध्यम से आर्मी से अपने चयन की मांग कर सकता है।

हाईकोर्ट में की जाएगी अपील
फैसले से हम सहमत नहीं हैं। अपराध होना किसी से छिपा नहीं है। लड़कियों के साथ छेड़छाड़ हुई है और वह अपने बयान पर कायम हैं। कोर्ट में सात माह पहले सुनवाई हुई थी, तब से लगातार फैसले की तारीख दी जा रही थी। इतने समय बाद अब फैसला देना खुद में बड़ा सवाल है। दोनों बहनों के साथ अन्याय हुआ है। मामले की अपील हाईकोर्ट में की जाएगी।
- अतर सिंह पंवार, दो बहनों के अधिवक्ता

नहीं वीडियो को आधार: मलिक
आरोपी पक्ष के वकील प्रदीप मलिक ने बताया कि अदालत ने दोनों वीडियो में से किसी को भी आधार नहीं माना है। जो सबूत अदालत के सामने पेश किए गए, उन्हीं के आधार पर फैसला सुनाया गया है।
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ऐसे चला घटनाक्रम

रोहतक सिस्टर्स
- 28 नवंबर, 2014: पूजा और आरती ने कुलदीप, मोहित और दीपक पर छेड़छाड़ और मारपीट के आरोप लगाए।
- 28 नवंबर, 2014: तीनों युवकों पर सदर थाने में धारा 354 के तहत केस दर्ज किया गया।
- 29 नवंबर, 2014: तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
- 30 नवंबर, 2014: आरोपी अदालत से जमानत पर रिहा हो गए।
- 30 नवंबर, 2014: प्रदेश सरकार ने दोनों बहनों को बहादुरी पुरस्कार देने की घोषणा की।
- 02 दिसंबर, 2014: दोनों बहनों का एक और वीडियो वायरल हो गया।
- 05 दिसंबर, 2014: छह महिलाओं ने पुलिस को आरोपियों के पक्ष में एफिडेविट सौंपे।
- 28 अगस्त, 2015:  सदर थाना पुलिस ने चालान पेश किया।
- 18 दिसंबर, 2015: आरोपियों का लाई डिटेक्टर टेस्ट हुआ।
- 22 दिसंबर, 2015: दोनों बहनों का लाई डिटेक्टर टेस्ट हुआ।
- 30 जनवरी, 2017: मामले पर अदालत में बहस शुरू हुई।
- 17 फरवरी, 2017: दूसरी बार मामले की सुनवाई हुई।
-  03 मार्च, 2017: अदालत ने आरोपियों के पक्ष में फैसला सुना दिया।
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