वहीं इस मामले में एसआईटी ने अदालत में कहा कि उनकी जांच में सामने आया है कि घटना के समय एसएसपी चरणजीत सिंह व उनके रीडर इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह द्वारा लोगों से दुर्व्यवहार किए जाने के बाद मामला भड़का था।
प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केस बनेगा गले की फांस
बहिबल गोलीकांड में प्रदर्शनकारियों पर दर्ज इरादा ए कत्ल की एफआईआर ही आरोपी पुलिस अफसरों के गले की फांस बनती दिखाई देने लगी है। घटना वाले दिन 14 अक्तूबर 2015 को थाना बाजाखाना में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर नंबर 129 दर्ज की गई थी। इसमें एसएसपी मोगा चरणजीत सिंह शर्मा, एसपी बिक्रमजीत सिंह, इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह आदि के धारा 161 के दर्ज बयान का उल्लेख करते हुए एसआईटी ने कहा कि उस दिन पुलिस ने अपने बचाव में गोलियां चलाई थीं।
एसआईटी की पड़ताल के दौरान सामने आया है कि ड्यूटी पर तैनात सभी पुलिस अधिकारियों व कर्मियों ने अपने हथियारों के साथ सारे कारतूस भी जमा करवा दिए थे। यदि पुलिस ने कोई गोली ही नहीं चलाई तो किसकी गोलियों से दो नौजवानों की मौत हुई और इतने लोग जख्मी हुए।