लुधियाना के जमालपुर इलाके की आहलुवालिया कालोनी में सितंबर 2014 में फर्जी एनकाउंटर में दो सगे भाइयों की हत्या के मामले में गुरुवार को एडिशनल सेशंस जज राजकुमार की अदालत ने अकाली नेता और दो पुलिस मुलाजिमों को दोषी करार दे दिया है, जबकि एक व्यक्ति को बरी कर दिया गया है। अदालत 10 अक्तूबर को तीनों आरोपियों की सजा सुनाएगी।
जमालपुर की आहलुवालिया कालोनी में सितंबर 2014 में माछीवाड़ा के बोहापुर गांव के रहने वाले अनुसूचित जाति के दो सगे भाइयों हरिंदर सिंह (23) और जतिंदर सिंह(25) को खन्ना पुलिस ने फर्जी एनकाउंटर में मार दिया था। इस मामले में अदालत ने अकाली नेता गुरजीत सिंह, पंजाब पुलिस के कांस्टेबल यादविंदर सिंह और होमगार्ड के जवान अजीत को दोषी करार दे दिया है, जबकि इस मामले में पंजाब होमगार्ड के जवान बलदेव सिंह को बरी कर दिया गया है।
लेकिन इस मामले में नामजद थाना माछीवाड़ा के तत्कालीन एसएचओ इंस्पेक्टर मनजिंदर सिंह और उनके रीडर कांस्टेबल सुखबीर सिंह का सात साल बीतने के बाद भी कुछ पता नहीं चल पाया है। सात साल की लंबी लड़ाई के बाद परिवार को इंसाफ मिला है। अब अदालत 10 अक्तूबर को तीनों आरोपियों की सजा पर फैसला सुनाएगी। तीनों को हत्या, आर्म्स एक्ट और साजिश रचने का दोषी पाया गया है।
यह था मामला
सितंबर 2014 में जमालपुर की आहलुवालिया कालोनी स्थित एक महिला के पीजी में चार युवक मौजूद थे। इनमें माछीवाड़ा के गांव बोहापुर के रहने वाले सगे भाई हरिंदर सिंह और जतिंदर सिंह अपने दो साथियों के साथ मौजूद थे। उनके खिलाफ थाना माछीवाड़ा में हत्या के प्रयास का मामला दर्ज था लेकिन अधिकारियों ने जांच के कारण गिरफ्तारी पर रोक लगा रखी थी।
मगर अकाली नेता गुरजीत सिंह के दबाव के कारण माछीवाड़ा थाने के पूर्व एसएचओ इंस्पेक्टर मनजिंदर सिंह टीम के साथ वहां पहुंचे और घर में घुसकर दोनों सगे भाइयों को फर्जी एनकाउंटर में मार गिराया। इस दौरान पुलिस टीम के साथ अकाली नेता गुरजीत सिंह भी था। उस समय दोनों भाइयों के परिवार वालों ने कई आरोप लगाए थे।