पंजाब के बठिंडा में सफेद मक्खी के हमले से कपास की फसल तबाह होने से दुखी गांव बुर्ज महमा के किसान चरणजीत सिंह ने बुधवार को स्प्रे पीकर खुदकुशी कर ली। वहीं गांव सेंखू के किसान तेजा सिंह की सदमे से मौत हो गई।
चरणजीत के भाई गुरचरण सिंह ने बताया कि उसका भाई चरणजीत सिंह अविवाहित था। उसके पास दो एकड़ अपनी जमीन थी और पांच एकड़ ठेके पर ली थी। इस सात एकड़ उसने कपास की फसल बोई थी। सफेद मक्खी के हमले से चरणजीत सिंह की पूरी फसल खराब हो गई। चरणजीत पर सात लाख रुपये कर्ज भी था। फसल तबाह होने से वह परेशान रहने लगा। तनाव में आकर बुधवार की सुबह उसने खेतों में कीटनाशक पीकर जान दे दी।
दूसरे मामले में जिले के गांव सेंखू के किसान तेजा सिंह की फसल के बर्बाद होने के सदमे से खेत में ही मौत हो गई। पीड़ित परिवार के साथ दुख बांटने पहुंचे भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल के उपाध्यक्ष रामकरण सिंह रामां ने बताया कि तेजा सिंह के पास चार एकड़ जमीन थी।
इस जमीन पर उसने ग्वारे की फसल बोई थी। सफेद मक्खी के हमले से पूरी फसल बर्बाद हो गई थी। इससे वह कई दिन से तनाव में था। किसान नेताओं ने प्रदेश सरकार से तेजा सिंह के परिवार को दस लाख रुपये मुआवजा देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है।
हरबंस सिंह, किसान नेता ने बताया कि सरकार की शह पर नकली बीज और स्प्रे बिकने से इस बार कपास की फसल पर सफेद मक्खी का हमला ज्यादा बढ़ा है। प्रदेश सरकार की किसान विरोधी नीतियों के चलते किसान आत्महत्या कर रहे हैं। चरणजीत के परिवार को पांच लाख रुपये का मुआवजा और सरकारी नौकरी दी जाए।