कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल होने वाले सामान की कीमतें बढ़ने से रियल एस्टेट से जुड़े डेवलपर्स की सांसें फूल रही हैं। हालात यह बन रहे हैं कि कच्चे माल की कीमतें और निर्माण की लागत इसी तरह बढ़ती रही तो वे अपनी परियोजनाओं को पूरा नहीं कर पाएंगे और उनका कारोबार ठप हो जाएगा।
पंजाब में बारीक व मोटी रेता दोनों के दाम काफी अधिक हो चुके हैं। क्रशर पर सरकार बुरी तरह से घिरी हुई है, इसलिए बिल्डरों को बाहरी प्रदेशों से सामान मंगवाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं पिछले तीन दिन में लोहे की कीमत में 5 रुपये से अधिक प्रति किलो का उछाल आने के कारण सरिया महंगा हो चुका है। सीमेंट की बोरी 380 रुपये तक पहुंच गई है, जो पहले 300 रुपये के आसपास मिलती थी।
मोटी रेत - 60 रुपये क्यूबिक फुट है। तीन महीने पहले इसकी कीमत 30 से 32 रुपये क्यूबिक फुट थी।
बजरी - 40 से 45 रुपये क्यूबिक फुट है, छह महीने पहले इसकी कीमत 24 से 25 रुपये थी।
बारीक रेत - 65 से 70 रुपये प्रति क्यूबिक फुट है। तीन महीने पहले 25 रुपये प्रति क्यूबिक फुट थी।
सीमेंट - 380 रुपये प्रति बोरी पिछले साल कीमक 280 रुपये थी।
ईंट- 7 रुपये 60 पैसे, पिछले साल 5.50 रुपये प्रति ईंट था।
हमने तो पुराने दाम पर घर बुक कर रखे हैं, जेब से पैसा पड़ रहा है: रॉकी सहगल
ईको होम कंपनी के एमडी रॉकी सहगल का कहना है कि हमारा जब प्रोजेक्ट शुरू होता है तो उस समय की कंस्ट्रक्शन कीमत को कैलकुलेट किया जाता है। प्रोजेक्ट तैयार होने में दो साल का वक्त आसानी से लग जाता है। दो साल पहले जो बिल्डिंग मैटीरियल के दाम थे, वह अब दोगुना हो चुके हैं। बुक किये गए घरों की कीमत बढ़ाई नहीं जा सकती है, इसलिए कंस्ट्रक्शन की कीमत ने कमर तोड़कर रख दी है।
जेब से पैसे लग रहे हैं, सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए: ढींगरा
विक्टोरिया गार्डन के राजू ढींगरा व उनके बेटे मनप्रीत सिंह ढींगरा का कहना है कि ईंट, सीमेंट, बजरी, रेता सब महंगा हो चुका है। सूबे का रियल एस्टेट कारोबार एक कॉरपोरेट की तरह है, जिससे सरकार को रेवन्यू आ रहा है, इसको बचाने की जरूरत है। अगर यह इंडस्ट्री ठप हो गई तो काफी नुकसान होगा। फिलहाल, बिल्डर जेब से पैसा खर्च कर रहे हैं क्योंकि ग्राहकों के साथ क्वालिटी में समझौता नहीं किया जा सकता।