कोरोना की वजह से प्रदूषण में काफी फर्क देखना को मिला है। शहर की आबोहवा काफी शुद्ध हो गई है। दीपावली पर लोग पटाखे जलाकर प्रदूषण फैला देते हैं। इस बार हमें प्रण लेना होगा कि बिना पटाखों के रंग-बिरंगी दीपावली मनाई जाए ताकि प्रदूषण पर कोई फर्क न पड़ सके। इसके अलावा मैं अपने दोस्तों से भी पटाखों को नहीं जलाने के लिए जागरूक कर रहा हूं। -विजय बेनीवाल, रामदरबार फेस-1
दीये और मोमबत्ती जलाकर मनाऊंगी दिवाली
करीब पांच साल पहले पटाखे जलाने की काफी शौकीन थी। लेकिन समय के साथ-साथ पटाखों को जलाना बिल्कुल बंद कर दिया है। इसकी एक वजह है कि हमारे शहर में लगातार प्रदूषण का बढ़ना। साथ ही दोस्तों को भी मना पटाखे जलाने से मना किया है। इसके लिए एक पोस्टर भी बनाया है और सभी को पटाखों न जलाने के लिए प्रेरित कर रही हूं। इस बार की दिवाली घर में दीए और मोमबत्तियां जलाकर मनाऊंगी। -जागृति, सेक्टर 32डी
दीवाली पटाखों का नहीं.. रोशनी का त्योहार है
दीवाली पर हमें पटाखे नहीं चलाने चाहिए। इससे वायुमंडल प्रदूषित होता है। वायुमंडल दूषित होने से मनुष्य ही नहीं बल्कि पशु-पक्षिओं को भी गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ता है। पटाखों से होने वाली परेशानियों के बावजूद भी इन्हें अपनी शान समझते हैं। पटाखों से शरीर के किसी भी अंग को चोट लग सकती है। पटाखों पर खर्च के बजाय किसी जरूरतमंद को राहत सामग्री दी जाए जिससे उसके घर में भी दीवाली मनाई जा सके। हम शपथ लेते हैं कि अपने आसपास सभी लोगों को पटाखों से होने वाले दुष्परिणामों से अवगत कराएंगे। -सुनीता कुमारी, अध्यापक सेक्टर-19, पंचकूला
दिवाली पर जरूरतमंदों की मदद कर खुशियां बांटें
इस बार की दिवाली में हमें खुशियां बांटनी चाहिए। लॉकडाउन व कोरोना की वजह से कई लोगों की नौकरी चली गई है। इस दिवाली पर पटाखों पर खर्च होने वाले पैसों का इस्तेमाल जरूरतमंदों की मदद में करना चाहिए। पटाखों से पर्यावरण बिगड़ता है। इस बार दिवाली को खास मनाइए, लेकिन शोर व पटाखों से नहीं.. खुशियां बांटें और आपकी खुशी दोगुनी हो जाएगी। - वसुंधरा चौधरी, विद्यार्थी मोहाली।
स्टेशनरी का सामान लाकर जरूरतमंद विद्यार्थियों को दूंगी
मैं इस बार दीपावली के त्योहार को अलग ही ढंग से मनाने की प्रतिज्ञा लेती हूं। इस बार घर पर कोई पटाखा नहीं लाऊंगी। जो पैसा पटाखे पर खर्च करती थीं, उस पैसे का इस्तेमाल स्टेशनरी का सामान लाकर जरूरतमंद विद्यार्थियों को दूंगी। पटाखे नहीं फोड़ने से प्रदूषण तो कम होगा साथ ही जरूरतमंद की मदद भी हो सकेगी। - प्राची मेहरा, पंचकूला।
जहरीले धुएं से किसी की जान जोखिम में न डालें
हमें शपथ लेना चाहिए कि इस साल कोरोना महामारी को देखते हुए दीपावली पर हम पटाखे नहीं फोड़ेंगे। अपने मोहल्ले में भी सबको समझाकर इस बार पटाखों से दूरी रखने का निवेदन करेंगे। इस महामारी में किसी भी जगह होम क्वारंटीन में रह रहे मरीजों को ये जहरीली गैस बहुत घातक होगी। हम सब कोशिश करें कि जहरीले धुएं की वजह से किसी की भी जान जोखिम में डालें। आप सभी से अनुरोध है कि अपने अपने घरों में, निकटतम परिचितों, अपनी-अपनी संस्थाओं से जन जागरण के रूप में पटाखों का बहिष्कार करें और करवाएं। -नरेंद्र वर्मा, सेक्टर 20 सी चंडीगढ़
इस बार मोहाली में दिवाली पर पटाखे नहीं चलाए जाएंगे, बल्कि पौधे लगाए जाएंगे। यह प्रण लिया है फेज-4 की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने। एसोसिएशन के सदस्यों का कहना है कि इस बार का हमारा प्रण काफी अहम है, क्योंकि जिस तरह कोरोना महामारी फैली हुई है, उस हिसाब से सभी को इस दिशा में सोचना होगा। इसके लिए एसोसिएशन बाकायदा एक मुहिम चलाएगी और इसमें सभी घरों को शामिल किया जाएगा। वहीं, इलाके के सोशल मीडिया ग्रुपों में भी इस बारे में लोगों को जागरूक किया जाएगा।
इस बार हम सभी ग्रीन दिवाली मनाएंगे। लोग अपने-अपने घरों में पटाखे चलाने के बजाय औषधीय और फलदार पौधे लगाकर इस त्योहार को मनाएंगे। इसके लिए हमारी एसोसिएशन सभी घरों में लगाने के लिए पौधे पहुंचाएगी और लोग अपने-अपने घरों में गिलोय और अन्य औषधीय पौधे लगाएंगे। जिससे लोगों को पर्यावरण बचाने के लिए प्रेरित किया जा सके। - रणजीत कौर, एसोसिएशन प्रधान
इस साल दिवाली पर पर्यावरण को बचाने के लिए खास ध्यान दिया जाएगा कि उनके आसपास के लोग दिवाली पर पटाखे न चलाएं। दिवाली के दिन सभी परिवारों को पौधे बांटे जाएंगे। इस काम के लिए सभी एसोसिएशन के सभी सदस्यों से राय ली जा रही है कि किस-किस किस्म के पौधे लोगों को गिफ्ट में देना चाहेंगे। - मोहिंदर सिंह, एसोसिएशन सदस्य
कोरोना कर डर बना हुआ है। हमने सभी को फोन पर ही संदेश भेजा है कि वे अपने घरों में पटाखे न जलाकर इस बार ग्रीन दिवाली मनाएं। वहीं हमारे घर में पिछले छह साल से पटाखे नहीं जलाए गए हैं। क्योंकि एक नेक काम की शुरूआत घर से ही होती है और हमारी कोशिश रहती है कि लोगों को भी पटाखे न चलाने के लिए प्रोत्साहित करें। - मितु कुमार, एसोसिएशन सदस्य
हम सभी को पर्यावरण के बचाव के लिए प्रदूषण फैलने से रोकना चाहिए। इसके लिए हम हर साल होने वाले दिवाली के त्योहार पर अगर पटाखे न चलाने का प्रण लें तो यह हमारा एक अहम कदम होगा। इस त्योहार के दिन ही बहुत से लोग पटाखे चलाते हैं तो उससे उठते धुएं से वातावरण में प्रदूषण ही फैलता है। इसे रोकने के लिए दिवाली पर ही नहीं हर तरह से प्रदूषण फैलने से रोकना चाहिए। - डॉ. रोमिका वढ़ेरा, एसोसिएशन सदस्य
पटाखों में मत बर्बाद करें पैसे
मेरी नजर में पटाखों पर हम पैसा ही बर्बाद करते हैं। सैकड़ों रुपये के पटाखों को घर में लाते हैं और उसके बाद उन पटाखों को हम आधे घंटे में जला डालते हैं। यदि हम इसी पैसे को किसी जरूरतमंद को दें तो शायद हम न सिर्फ किसी की मदद करेंगे बल्कि दूसरों के लिए एक मिसाल भी कायम करेंगे। - रोहित, छात्र, पंचकूला
दुर्घटना के जनक हैं पटाखे
पटाखों को जलाने से कई दुर्घटनाएं होती हैं। मैंने देखा है कि कई बार राकेट जैसे खतरनाक पटाखे दूसरों के घरों में घुस जाते हैं। यह काफी हृदय विदारक होता है। इससे न सिर्फ चोटिल होने का खतरा होता है बल्कि घर में आग लगने का खतरा भी होता है। इसलिए यदि पटाखों को मत चलाएं तो ज्यादा अच्छा होगा। - किशन, छात्र, पंचकूला
इस बार दिवाली में पटाखे न जलाने की शपथ ली है। पर्यावरण को बचाने के लिए अपने दोस्तों और पड़ोसियों को भी जागरुक करूंगा। पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए एक युद्ध पटाखों के विरुद्ध अमर उजाला के अभियान को सफल बनाने में सभी से सहयोग देने की अपील करूंगा। क्योंकि पटाखों से निकलने वाला धुआं मानवीय जीवन के लिए काफी नुकसानदायक होता है। इसका असर सीधा हमारी सेहत और पर्यावरण पर भी पड़ता है। -पुष्कर, निवासी नयागांव
दिवाली पर नहीं चलाएंगे पटाखे
दिवाली खुशियों का त्योहार है। इस दिन को पूरे भारत में रोशनी पर्व के रूप में मनाया जाता है। इसलिए इस दिन हमें सादगी के साथ अपने घर को दीये की जगमगाती रोशनी से सजाकर और पटाखे न फोड़कर दूसरों में खुशियां बांटनी चाहिए। मैं यह प्रण लेता हूं कि इस बार दिवाली पर पटाखे नहीं चलाऊंगा। दिवाली में पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए पेंटिंग के जरिये संदेश दूंगा। -युवराज पांडे, निवासी नयागांव
लोगों को प्रेरित करूंगी... पटाखे न चलाएं
दिवाली पर हर साल पटाखे चलाने के दौरान कई लोग आग से झुलस जाते हैं तो कई लोगों की आंखों की रोशनी तक चली जाती है। इसके साथ ही प्रदूषण भी खराब होता है। इस बार दिवाली पर अपने भैया को आतिशबाजी चलाने से मना करूंगी और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करूंगी। मैंने यह संकल्प लिया है। इस दिवाली पर पहली बार मैं अमर उजाला के अभियान का हिस्सा बनकर लोगों में पौधे वितरित करूंगी। -गुंजन, निवासी नयागांव