औद्योगिक नगरी में प्रवासियों के लिए हालात मुश्किल बन चुके हैं। घर में राशन खत्म हो चुका है, किराया देने के लिए पैसे नहीं है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाया है, लेकिन यह पता नहीं ट्रेन में कब बैठेंगे। यही हालात प्रवासियों को पैदल घर जाने के लिए मजबूर कर रहे हैं। इनकी यह मजबूरी सरकार के दावों पर सीधा प्रश्न चिन्ह लगा रही है।
आखिरकार जो मदद के आंकड़े पेश किए जा रहे हैं, वह मदद आखिरकार है कहां। आदर्श नगर निवासी रीना का पति संजय एक फैक्टरी में सिलाई का काम करता था। लॉकडाउन के बाद अब घर पर ही है। हर माह 1200 रुपये कमरे का किराया और बिजली का बिल अलग से देना है। दो माह से कुछ नहीं दे सके हैं। घर में कुछ राशन था, लेकिन चार दिन से वह भी खत्म हो चुका है, कोई दुकानदार उधार देने के लिए तैयार नहीं। सरकारी मदद के हेल्पलाइन नंबर पर कुछ नहीं मिल रहा है।
रीना ने बताया कि वह गोरखपुर यूपी के रहने वाले हैं। उन्होंने घर जाने के लिए दो मई को रजिस्ट्रेशन भी करवा दिया था। 18 दिन बाद भी पता नहीं घर जाने की बारी कब आएगी। मदद के लिए डीसी दफ्तर पहुंची तो वहां पर भी कोई सरकारी अधिकारी नहीं मिला, आखिरकार खाली हाथ लौटना पड़ा। रीना बताती है कि एक बड़ी समस्या यह है कि राशन मिल भी जाए तो पकाएं कैसे। क्योंकि सिलेंडर खत्म हो चुका है। फ्री में गैस सिलेंडर देने के दावे सिर्फ हवाई दिखाई दे रहे हैं।