सुबह 11 बजे जालंधर के कपूरथला चौक से कुछ दूर स्थित संगत सिंह नगर गुरुद्वारा में एक सजी हुई कार रुकती है। कार से दूल्हे समेत पांच लोग उतरते हैं। इस दौरान न बैंड बाजा होता है और न नाच गाना। दरअसल, गुरु घर में मकसूदां की रहने वाली नेहा महाजन की शादी थी। मानसा से दूल्हा रमनदीप सिंह अपने मां-बाप और बहनों के साथ बरात लेकर आए।
रमनदीप गुरुघर के अंदर जाकर बैठ जाते हैं। वहां पर सभी को चाय-पानी कराया जाता है। इसके कुछ समय बाद नेहा महाजन अपनी मां और बहनों के साथ आती हैं। श्री गुरु ग्रंथ साहब जी की हाजिरी में रमनदीप और नेहा फेरे लेते हैं और उसके बाद अरदास और कीर्तन सुनते हैं। गुरुद्वारे के अंदर दोनों परिवारों से सिर्फ 10 लोग ही होते हैं, जो सामाजिक दूरी बनाकर कीर्तन श्रवण करते हैं।
रमनदीप ने बताया कि उनकी शादी काफी समय से तय थी। पैलेस से लेकर संगीत और डीजे तक की व्यवस्था थी। कार्ड भी बांटे जा चुके थे, पहले तो तय किया कि शादी कुछ समय के लिए स्थगित कर देनी चाहिए लेकिन फिर तय किया कि शादी करेंगे लेकिन सरकारी निर्देशों के अनुसार। सेहराबंदी घर पर ही की और इसके बाद मानसा से वहां से एक ही कार में हम लोग निकले। सफर लंबा था, इसलिए रास्ते में सेहरा उतार दिया। कुछ समय कार में नींद ली। दोनों के परिजनों ने घर का ही भोजन किया। दोपहर करीब 2.30 बजे नेहा अपने पति रमनदीप सिंह के संग मानसा के लिए रवाना हुईं।