पंजाब कांग्रेस के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू एक नए विवाद में फंस गए हैं। उन्होंने कुछ दिन पहले एक रैली में पुलिस को लेकर आपत्तिजनक बयान दिया था। इस मामले में अब वह घिरते नजर आ रहे हैं। पहले चंडीगढ़ पुलिस के डीएसपी दिलशेर चंदेल ने एक वीडियो जारी कर सिद्धू के बयान की निंदा की। उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए सिद्धू को मानहानि का नोटिस दिया है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के वकील रंजीवन सिंह व अन्य वकीलों के जरिए सिद्धू को यह लीगल नोटिस वाया पोस्ट भेजा गया है। नोटिस में सिद्धू को बिना शर्त माफी मांगने को कहा गया है। डीएसपी चंदेल के मुताबिक सिद्धू ने सुल्तानपुर लोधी की रैली में पुलिस पर आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणी की थी।
नवजोत सिंह सिद्धू के आपत्तिजनक बयान पर जालंधर देहात के सब इंस्पेक्टर बलवीर सिंह का दर्द छलक आया। बलवीर सिंह ने वीडियो जारी कर कहा है कि यह बहुत बुरी बात है कि हमारे खिलाफ नवजोत सिद्धू ने ऐसी टिप्पणी की है। मैं डीजीपी से गुजारिश करता हूं कि पंजाब पुलिस के अक्स को खराब न होने दिया जाए। हम परिवार के साथ समाज में रहते हैं। बच्चे पूछते हैं कि हमारे खिलाफ ऐसी भाषा क्यों कही जा रही है ? पंजाब पुलिस में महिला पुलिस सब इंस्पेक्टर, कांस्टेबल और ऊंचे पदों पर आसीन अफसर भी हैं। मुझे अफसोस है कि सिद्धू ने यह बात पूरी पंजाब पुलिस को कही है न कि किसी थानेदार को।
लुधियाना के सांसद रवनीत बिट्टू ने भी सिद्धू पर निशाना साधते हुए कहा कि पंजाब पुलिस की इज्जत सिर्फ पंजाब में ही नहीं बल्कि पूरे देश में होती है। इसका अपमान पंजाबियों का अपमान है। उन्होंने कांग्रेस की ओर से पुलिस से माफी मांगी और पुलिस की प्रशंसा की। बिट्टू ने सिद्धू को पुलिस बल का मनोबल न गिराने की सलाह दी।
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू से कहा है कि वह पंजाब पुलिस मुलाजिमों के खिलाफ इस्तेमाल की गई भद्दी शब्दावली के लिए माफी मांगें। पार्टी प्रवक्ता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि नवजोत सिद्धू द्वारा पंजाब पुलिस के खिलाफ भद्दी शब्दावली का इस्तेमाल किए जाने पर भी मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और गृहमंत्री सुखजिंदर रंधावा मूकदर्शक बने बैठे हैं।
उन्होंने कहा कि इस मामले में पहले एक डीएसपी को बोलना पड़ा और अब एक एसआई ने एतराज जताया है। वर्दी में होते हुए एक शक्तिशाली इंसान के खिलाफ बोलना बहुत मुश्किल होता है लेकिन इन पुलिस अधिकारियों के बयानों से उसके अंदर के गुस्से और मानसिक अवस्था को समझा जाना चाहिए। मुख्यमंत्री और गृहमंत्री को चाहिए कि वह अपने नेता को समझाएं कि पुलिस के खिलाफ बयानबाजी और मनोबल गिराने वाली टिप्पणियों से गुरेज करें।