चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विद्यार्थियों के एक वर्ग का आरोप है कि कई मास्टर ऑफ आर्ट्स विभागों में दाखिले पूरे होने से पहले ही चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई। इसके चलते करीब दो हजार नए छात्रों के मतदान करने और चुनाव लड़ने के अधिकार पर सवाल उठ रहे हैं।
विद्यार्थियों का कहना है कि विश्वविद्यालय कैलेंडर और लिंगदोह आयोग की सिफारिशों के अनुसार चुनाव प्रक्रिया दाखिले पूरे होने के बाद शुरू होनी चाहिए, ताकि सभी पात्र विद्यार्थियों को मतदाता सूची में शामिल होने और चुनाव लड़ने का समान अवसर मिल सके। सोमवार को एमए के कई विभागों में दाखिले हुए, जबकि चुनाव के लिए नामांकन की समय सीमा भी उसी दिन समाप्त हो गई। ऐसे में नए दाखिला लेने वाले छात्रों के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके और वे नामांकन भी नहीं भर पाए।
छात्रों का कहना है कि मामला केवल छात्र संघ के पदाधिकारियों के चुनाव तक सीमित नहीं है। पीयू में विभागीय प्रतिनिधियों के चुनाव भी होते हैं। ऐसे में नए छात्रों को अपने प्रतिनिधि चुनने और स्वयं चुनाव लड़ने का अवसर नहीं मिलने पर सवाल उठ रहे हैं।
पहली बार इतने छात्रों के अधिकार प्रभावित होने का दावा
विद्यार्थियों के अनुसार स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में दाखिले की तारीखें अलग-अलग होती हैं। ऐसे में एमए दाखिले पूरे होने से पहले चुनाव प्रक्रिया शुरू होने पर बड़ी संख्या में छात्र चुनावी प्रक्रिया से बाहर हो जाते हैं। छात्र संगठनों ने इसे विश्वविद्यालय की लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है।