डॉक्टरों के प्रमोशन मामले में अब चंडीगढ़ पीजीआई की स्टैडिंग सलेक्शन कमेटी का एक और फैसला सवालों के घेरे में आ गया है। कमेटी ने जिस डाक्टर को प्रमोशन के इंटरव्यू में फेल कर दिया था, बाद में उसे पास कर प्रमोट कर दिया गया है। यह फैसला भी बुधवार को नई दिल्ली में गवर्निंग बॉडी की मीटिंग में लिया गया है। इस फैसले से एक बात साबित हो गई है कि डा. रवि भेदभाव व भाई-भतीजावाद के शिकार हुए थे।
अमर उजाला इस मुद्दे को पहले भी उठा चुका है कि पीजीआई में किस तरह से डाक्टरों के सलेक्शन और प्रमोशन में भाई-भतीजावाद होता है। डा. रवि कनौजिया पीडियाट्रिक सर्जरी में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर तैनात थे। उन्होंने साल 2015 में एडिशनल प्रोफेसर के लिए पीजीआई की स्टैंडिंग सलेक्शन कमेटी के सामने इंटरव्यू दिया था। वे अपनी फील्ड में काफी माहिर थे।
उनके कई पब्लिकेशन नेशनल व इंटरनेशनल जरनल में प्रकाशित हो चुके थे, इसलिए सभी मानकर चल रहे थे कि डा. रवि कनौजिया का प्रमोशन होगा। लेकिन जब रिजल्ट आया तो डा. रवि को प्रमोशन न देकर एक जूनियर को प्रमोट कर दिया गया। इससे हर कोई हैरान हो गया। पीजीआई फैकल्टी के बीच चर्चा का विषय बन गया। सलेक्शन कमेटी पर भेदभाव और भाई भतीजावाद का आरोप लगा।