उन्होंने यह भी सवाल किया था कि कितने संविदा कर्मचारी, जिन्होंने अभी तक 10 साल की सेवा पूरी नहीं की है, इस कार्यकाल के पूरा होने के बाद नियमित किए जाएंगे। ऐसे हालात न बने इसलिए सरकार ने नीतिगत रास्ता अपनाने का फैसला किया है। इससे सरकार को नया कानून बनाने और राज्यपाल से मंजूरी लेने के कठिन रास्ते को दरकिनार करने में मदद मिलेगी।
मुख्य सचिव विजय कुमार जंजुआ ने पुष्टि की है कि मसौदा नीति अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि हम एक ऐसी नीति तैयार करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं जो कानूनी जांच का सामना करेगी। 36,000 संविदा कर्मचारियों की सेवाओं को जल्द ही नियमित किया जाएगा। सचिव स्तर के अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने नीति मार्ग अपनाने और उन कर्मचारियों को नियमित करने का निर्णय लिया है जिन्होंने सेवा का एक निश्चित कार्यकाल पूरा कर लिया है। कैबिनेट उपसमिति द्वारा अभी तक शब्द तय नहीं किया गया है। नीति को अंतिम रूप देने के लिए गुरुवार को कैबिनेट उपसमिति की बैठक हुई। बैठक में नीति के मसौदे पर अपनी राय देने के लिए कानूनी विशेषज्ञ भी मौजूद थे।